MI-17 को क्यों कहते हैं दुनिया का सबसे एडवांस हेलीकॉप्टर, जिसमें पीएम मोदी समेत कई वीवीआआईपी करते हैं सफ़र

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उर्वशी मिश्रा।
डेस्क। 8दिसम्बर,21

तमिलनाडु के कुन्नूर में आज सुबह सेना का विमान MI-17 का हेलीकाप्टर क्रैश हो गया। सीडीएस बिपिन रावत उनकी पत्नी और सेना के कई अधिकारी सवार थे। हेलिकॉप्टर सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन जा रहा था, लेकिन यह नीलगिरी में क्रैश हो गया।

क्‍यों खास है MI-17 हेलिकॉप्टर?

Mi-17 V5 को रशिया की कंपनी कजान हेलिकॉप्‍टर बनाती है. यह एक ट्विन इंजन मल्‍टीपर्पज हेलिकॉप्‍टर है और MI-8 का अपग्रेडेड वर्जन है। यह एक मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्‍टर है.

यह क्रू के 3 लोगों के साथ 36 सैनिकों को ले सकता है. दुनिया के करीब 60 देशों में 12 हजार से ज्‍यादा MI-17 हेलिकॉप्टर मौजूद हैं. इसे अध‍िक ऊंचाई और तेज गर्म मौसम में काम करने के लिहाज से तैयार किया गया है.

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Mi-17V-5 की गिनती दुनिया के सबसे एडवांस ट्रांसपोर्ट हेलिकाप्टरों में की जाती है. इसलिए इसका इस्‍तेमाल रेस्‍क्‍यू मिशन, ट्रांसपोर्टेशन, हैवीलिफ्ट और वीवीआईपी मूवमेंट में होता है.

यह 36 हजार किलो तक का वजन उठा सकता है. जिन Mi-17V-5 को वीवीआई के लिए मोडिफाय किया जाता है उसमें 20 लोग बैठ सकते हैं और इसमें खासतौर पर टॉयलेट भी होता है.

भारत में कब आया था Mi-17V-5

रक्षा मंत्रालय ने 80 Mi-17V-5 के ऑर्डर के लिए रूस के साथ 1.3 बिलियन डॉलर की की डील की थी. 2011 से इनकी डिलीवरी शुरू हुई थी. 2013 तक 36 Mi सीरीज हेलिकॉप्टर्स मिल चुके थे. भारत को Mi-17V-5 की आखिरी खेप जुलाई 2018 में मिली थी.

बुधवार को क्रैश हुए विमान में लगे ब्‍लैक बॉक्‍स के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. इस बॉक्‍स से घटना से जुड़ी कई जरूरी बातें सामने आ सकती हैं.

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क्या होता है ब्लैक बॉक्स?

यह बॉक्‍स प्‍लेन का एक जरूरी हिस्‍स होता है. इसका काम विमान की गतिविधियों को रिकॉर्ड करना होता है. इसलिए इसे फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर भी कहते हैं. यह विमान के पिछले हिस्‍से में होता है. यह इंजन की आवाज, इमरजेंसी अलार्म की आवाज , केबिन और कॉकपिट की आवाज को रिकॉर्ड करता है, ताकि यह पता चल सके कि हादसे के पहले विमान का माहौल किस तरह का था.

टाइटेनियम का बना होने के कारण ब्‍लैक बॉक्‍स को काफी मजबूत माना जाता है. इसे इसलिए मजबूत बनाया जाता ताकि ऊंचाई से जमीन पर गिरने या समुद्री पानी में गिरने की स्थिति में भी इसको कम से कम नुकसान हो.

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ये काम करता है ब्‍लैक बॉक्‍स

इसका काम विमान की दिशा, ऊंचाई, ईधन का स्‍तर, गति और केबिन का तापमान आदि को रिकॉर्ड करने का काम करता है. खास बात है कि ब्‍लैक बॉक्‍स 11000°C के तापमान को एक घंटे तक सहन कर सकता है. यह बिना बिजली के 30 दिन तक काम करता है. हादसे के बाद यह जहां भी गिरता है वहां से लगातार 30 दिन तक आवाज और तरंगे निकालता रहता है. इसकी मदद से इसे खोज लिया जाता है.

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