कैटल फ्री सिटी के दावा फैल : सांड के हमले में 67 साल के व्यक्ति की मौत

जयपुर

जयपुर शहर में आवारा पशुओं की समस्या लगातार जानलेवा बनती जा रही है। नगर निगम द्वारा किए जा रहे कैटल फ्री सिटी के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसका सबसे ताजा उदाहरण नवरतन अग्रवाल की दुखद मृत्यु है। तीन फरवरी को दूध लेने निकले 67 वर्षीय नवरतन अग्रवाल पर एक आवारा सांड ने हमला कर दिया था। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और कोमा में चले गए। 41 दिनों तक मौत से जूझने के बाद , 15 लाख के ख़र्चे के बाद भी 16 मार्च को उन्होंने अंतिम सांस ली।

नवरतन अग्रवाल की पत्नी सुमित्रा अग्रवाल ने बताया, हर रोज की तरह वे तीन फरवरी की सुबह दूध लेने निकले थे। बिल्कुल स्वस्थ और ठीक-ठाक थे। लेकिन इस बार वे लौटकर नहीं आए। सांड ने उनके सिर पर पीछे से टक्कर मार दी थी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन भी किया, लेकिन उनके सिर में खून जम गया और वे कोमा में चले गए। डेढ़ महीने तक उन्होंने आंखें तक नहीं खोली। हमने 15 लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए, लेकिन फिर भी उन्हें नहीं बचा पाए। मेरे लिए तो सांड काल बनकर आया था।

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95 वर्षीय पिता बोले- बेटे की मौत मेरा सबसे बड़ा अफसोस
मृतक के 95 वर्षीय पिता सत्यनारायण कचहरी जो स्वतंत्रता सेनानी हैं, वो अपने बेटे को खोने के बाद टूट चुके हैं। वे कहते हैं, मैंने अपने बेटे को खो दिया, यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा अफसोस है। मैं 95 साल का हो गया, इतनी लंबी उम्र तक खुद को संभालकर रखा, लेकिन अब मेरा मन टूट गया है। नगर निगम की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं। मेरे पास अब शब्द नहीं हैं कि मैं अपना दर्द कैसे बयान करूं।

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परिवार ने नगर निगम को ठहराया जिम्मेदार
स्थानीय निवासी एडवोकेट नवीन चौहान का कहना है कि आवारा पशु हमारे यहां वार्ड में घूमते रहते हैं। पहले भी ऐसी घटना देखने को मिली है कि आवारा कुत्तों ने कई छोटे बच्चों को यहां पर काट लिया था। हम लोगों ने शिकायत भी दी, लेकिन उसे शिकायत का कोई निस्तारण नहीं हुआ। उसके बाद भी नवरत्न अग्रवाल जो कि लगभग तीन फरवरी को घर से बाहर दूध लेने जा रहे थे। आवारा सांड ने उन्हें मारा और अब पूरी दुनिया में नहीं रहे। मैं थाने में परिवाद भी दिया हूं और उचित कार्रवाई की मांग भी की है।

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मृतक के भाई की पत्नी साधना कचहरी ने भी नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, हमारे भाई साहब को सांड ने इतनी जोर से मारा कि वे मौके पर ही बेहोश हो गए। डेढ़ महीने तक वे कोमा में रहे, लेकिन हमें उम्मीद थी कि वे वापस आएंगे। पर ऐसा नहीं हुआ। नगर निगम की लापरवाही की वजह से ही यह हादसा हुआ। यह कोई पहली घटना नहीं थी। हर नुक्कड़ पर 3-4 सांड घूमते हैं।

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