उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे… खरगे ने धनखड़ का जिक्र कर नए चेयरमैन को दिया बड़ा संदेश

नई दिल्ली 
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ का जिक्र कर दिया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि दुख है कि सदन को उन्हें विदाई देने का मौका नहीं मिला। खास बात है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के पाद सीपी राधाकृष्णन सभापति के तौर पर पहली बार सत्र संभाल रहे हैं। धनखड़ ने जुलाई में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था।
 
खरगे ने कहा, '…मुझे उम्मीद है कि आप इस बात का बुरा नहीं मानेंगे कि मुझे आपके पहले राज्यसभा के चेयरमैन के अचानक पद छोड़ने का जिक्र करना पड़ रहा है। पूरे सदन का संरक्षक होने के नाते सभापति जितना सरकार के होते हैं, उतना ही विपक्ष के भी होते हैं। मुझे इस बात का दुख है कि सदन को उन्हें विदाई देने का मौका नहीं मिला। पूरे विपक्ष की तरफ से हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।'

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उन्होंने कहा, 'यहां सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बात का जिक्र करना उचित होगा। 16 मई 1952 को उन्होंने कहा था कि मैं किसी पार्टी का नहीं हूं। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि कई लोग दावा कर रहे हैं कि आप उनकी पार्टी के हैं…।' उन्होंने कहा, 'अगर लोकतंत्र विपक्ष को सरकार की नीतियों की उचित, मुक्त आलोचना करने की अनुमति नहीं देता है, तो लोकतंत्र के अत्याचार में बदलने की संभावना होती है। ऐसा सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था।'

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संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामेदार रहने और इसमें गतिरोध पैदा होने के आसार हैं। सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। रविवार को अधिकतर विपक्षी दलों ने एक सुर में यह मांग उठाई कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर चर्चा कराई जानी चाहिए। हालांकि, सरकार ने कहा कि संसद की कार्यवाही अच्छी तरह चलनी चाहिए और वह गतिरोध की स्थिति को टालने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी रखेगी।

जुलाई में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में धनखड़ ने कहा था, 'स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और मेडिकल एडवाइज का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा।' इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंत्री परिषद का भी धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है और दफ्तर में रहने के दौरान मैंने काफी कुछ सीखा है।'

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हालांकि, अटकलें लगाई जा रही थीं कि विपक्ष की तरफ से लाए जाने वाले प्रस्ताव को दिए जाने के चलते धनखड़ और सरकार में अनबन थी। हालांकि, इसे लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

 

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