दिसंबर में खरमास को लेकर कंफ्यूजन खत्म! एक क्लिक में जानें सही शुरुआत

हिंदू धर्म में खरमास  को एक ऐसा समय माना जाता है जब लगभग एक महीने तक सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. साल 2025 का आखिरी महीना दिसंबर जल्द ही शुरू होने वाला है, और इसके साथ ही लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि खरमास की शुरुआत 15 दिसंबर को होगी या 16 दिसंबर को? अगर आपके मन में भी यही उलझन है, तो यहां पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर हम आपकी यह कन्फ्यूजन दूर कर रहे हैं.

खरमास 2025 कब से हो रहा है शुरू?

    पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2025 में खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 से होगी.
    खरमास शुरू होने की तिथि: 16 दिसंबर 2025, मंगलवार
    समापन की तिथि: 14 जनवरी 2026, बुधवार (मकर संक्रांति के दिन)
    अवधि: लगभग 30 दिन

ये भी पढ़ें :  15 दिसंबर को रात 10:19 बजे धनु राशि में गोचर करेंगे और तभी से खरमास आरंभ हो जाएंगे, जानें इस दौरान क्या करें और क्या न करें

खरमास की शुरुआत धनु संक्रांति के साथ होगी. इस दिन सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर अपने मित्र ग्रह बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करेंगे. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा. वहीं खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन होगी, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही एक बार फिर विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की रौनक लौट आएगी.

खरमास को अशुभ क्यों माना जाता है?

मान्यताओं के अनुसार, खरमास का समय ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि के लिए शुभ नहीं माना जाता है. इसके पीछे मुख्य ज्योतिषीय कारण हैं:

सूर्य का धनु राशि में गोचर: सूर्य जब गुरु (बृहस्पति) की राशियों (धनु और मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास कहा जाता है.

ये भी पढ़ें :  भांजी सिमर भाटिया के डेब्यू पर इमोशनल हुए अक्षय कुमार, बोले— ‘गोद में उठाने से आज तक…’

गुरु का प्रभाव कमजोर होना: ज्योतिष के अनुसार, बृहस्पति को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है. जब सूर्य, धनु राशि (जिसके स्वामी गुरु हैं) में गोचर करते हैं, तो सूर्य के तेज के कारण गुरु का प्रभाव कुछ कम हो जाता है. इस कारण मांगलिक कार्यों में शुभ फल की कमी मानी जाती है.

सूर्य की धीमी गति: इस दौरान सूर्य की चाल भी धीमी हो जाती है, जिसे मलमास भी कहा जाता है. नए कार्यों या बड़े आयोजनों को शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता.

खरमास में कौन से कार्य वर्जित हैं?

विवाह और सगाई: शादी-विवाह और सगाई जैसे समारोहों को पूरी तरह से वर्जित माना जाता है.

गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) या किसी भी नए निर्माण कार्य की शुरुआत करना.

ये भी पढ़ें :  खरमास में शुक्र का विशेष गोचर, 3 राशियों के लिए मान-सम्मान और कमाई में बढ़ोतरी

मुंडन और कर्णवेध: बच्चों के मुंडन संस्कार या कान छेदन जैसे संस्कार.

नया व्यापार या नौकरी: किसी भी बड़े नए व्यापार या व्यवसाय की शुरुआत करना.

जनेऊ संस्कार (उपनयन संस्कार): यह संस्कार भी इस दौरान नहीं किया जाता है.

खरमास में क्या करना शुभ होता है?

खरमास का समय धार्मिक और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस अवधि में आप निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

पूजा-पाठ: भगवान सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना बहुत फलदायी होता है.

दान: गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना जाता है.

तीर्थ यात्रा: पवित्र नदियों में स्नान और तीर्थ यात्रा करना इस दौरान बहुत ही पुण्यकारी माना गया है.

मंत्र जाप: ध्यान, जप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना.

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment