भारत में जहां-जहां गजनी का नाम है, उसे हटाया जाना चाहिए— स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान

नई दिल्ली
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'प्रधानमंत्री जी ने जो ट्वीट पोस्ट किया है, वह हजार वर्ष पहले की घटना के बारे में है, जिसमें सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण होने का दर्द व्यक्त किया गया है। एक व्यक्ति था महमूद गजनवी, जो अपनी सेना के छोटे-से दल के साथ आया और मंदिर को क्षति पहुंचाई। वहां पूजा करने वाले पुजारियों को उसने नुकसान पहुंचाया, भक्तों को चोट पहुंचाई। उसने यह सोचकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कि अगर मंदिर और मूर्तियां नष्ट कर दी जाएं तो सोमनाथ नष्ट हो जाएगा।'
 
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि यह प्रयास हजार वर्ष पहले किया गया था। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी की ओर से पोस्ट किया गया ट्वीट यह संदेश देना चाहता है कि तुम मंदिर तोड़ सकते हो, मूर्तियां तोड़ सकते हो, लेकिन सोमनाथ को नष्ट नहीं कर सकते। हजार वर्ष बीत गए, सोमनाथ आज भी खड़ा है। इसलिए भविष्य में जो लोग ऐसे प्रयास करेंगे, उन्हें फिर कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर यही कहना चाहते हैं तो यह स्वागतयोग्य कदम है।' उन्होंने कहा कि जहां तक गजनी का सवाल है, उसने निश्चित रूप से अच्छा काम नहीं किया। इसलिए भारत में जहां-जहां भी गजनी का नाम आता है, उसे हटा देना चाहिए।
11 जनवरी को सोमनाथ जाएंगे पीएम मोदी

ये भी पढ़ें :  श्रद्धा की डोर से बंधे हजारों भक्त, अमरनाथ यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

पीएम मोदी विदेशी आक्रमणकारियों के बार-बार हमलों के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का 11 जनवरी को दौरा करेंगे। उन्होंने सोमनाथ मंदिर की सराहना करते हुए सोमवार को कहा कि गुजरात स्थित यह मंदिर भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1,000 साल पूरा होने पर ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘हमारी सभ्यता की अदम्य भावना का सोमनाथ से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। यह मंदिर बाधाओं एवं संघर्षों पर विजय प्राप्त करते हुए गौरव के साथ खड़ा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमनाथ की गाथा भारत माता की उन अनगिनत संतानों के अटूट साहस की कहानी है जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की। यही भावना आज राष्ट्र में भी दिखाई दे रही है जो सदियों के आक्रमणों और औपनिवेशिक लूट से उबरकर वैश्विक विकास के सबसे चमकते केंद्रों में से एक बनकर उभरा है।'

ये भी पढ़ें :  असदुद्दीन ओवैसी ने PF के नए नियमों को बताया ‘अन्याय’, EPFO का पलटवार

 

Share

Leave a Comment