बिपाशा बसु ने 7 जनवरी को मनाई 47वीं बर्थडे, फिटनेस को लेकर आज भी वही जुनून

मुंबई 

बिपाशा बसु 07 जनवरी को 47 साल की हो गई हैं और उनका फिटनेस को लेकर नजरिया आज भी उतना ही जरूरी है जितना पहले था. मॉडल से एक्टर बनीं बिपाशा हमेशा से ताकत, अनुशासन और फंक्शनल मूवमेंट के लिए जानी जाती रही हैं, वो भी तब जब इंडिया में जिम कल्चर इतना आम नहीं था. अपने मॉडलिंग के शुरुआती दिनों से ही बिपाशा अपनी एथलेटिक बॉडी के लिए अलग दिखती थीं और उन्होंने हमेशा ये बताया कि फिटनेस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि काबिलियत और हिम्मत के लिए है. 2018 के एक पुराने जिम सेशन में बिपाशा ने खासकर महिलाओं के लिए वेट ट्रेनिंग को जरूरी बताया था.

उनका मैसेज बहुत सीधा था:
मजबूत होना ही असली खूबसूरती है. उन्होंने बताया कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से बॉडी फैट कम होता है, मसल्स मजबूत होते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा घटता है और पीठ दर्द, आर्थराइटिस और चोटों से बचाव होता है. बिपाशा के लिए फिटनेस का मतलब पतला होना नहीं, बल्कि खुद को मजबूत बनाना था.

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उनका सलाह साफ थी:
जितना जल्दी शुरू करोगे, उतना अच्छा है. इतने सालों की कोशिशों के बाद भी कई महिलाएं वेट उठाने से डरती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बॉडी भारी हो जाएगी. इस गलतफहमी को दूर करते हुए फिटनेस एक्सपर्ट मैत्री बोदा ने बताया कि महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन नाम का हार्मोन कम बनता है, जो मसल्स को बहुत बड़ा करने के लिए जरूरी होता है. इसलिए वेट ट्रेनिंग से महिलाएं भारी नहीं होतीं, बल्कि उनकी बॉडी स्लिम और टोन हो जाती है. फिटनेस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक हेल्दी रहने के लिए भी जरूरी है.

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मॉडलिंग से एक्टिंग में आई थी बिपाशा बसु

बिपाशा बसु ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। उन्होंने 2001 में आई फिल्म अजनबी से एक्टिंग करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने राज, जिस्म, नो एंट्री, फिर हेरा फेरी, ओमकारा, प्लेयर्स, अपहरण, मदहोशी, जमीन सहित कई फिल्मों में काम किया। वे आखिरी बार 2015 में आई फिल्म अलोन में नजर आईं थी।

मसल्स बढ़ने से बॉडी का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और उम्र के साथ मसल्स कम होने की दिक्कत भी कम होती है. महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन वेट ट्रेनिंग से हड्डियां मजबूत होती हैं और फ्रैक्चर का रिस्क कम होता है. एक और गलतफहमी है कि वेट उठाना खतरनाक है, जबकि सही तरीके से और गाइडेंस में करने पर ये जोड़ों को मजबूत करता है, बैलेंस बेहतर करता है और रोजमर्रा के काम आसान बनाता है.

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बिपाशा बसु ने अपने उदाहरण और लगातार मैसेज से इंडिया में महिलाओं की फिटनेस को लेकर सोच बदलने में मदद की है. मैत्री बोदा जैसी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर वो ये बात बार-बार दोहराती हैं कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कोई ऑप्शन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सेहत और लंबी उम्र के लिए जरूरी है.

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