असफलता का सबसे बड़ा कारण है लोकलाज और मृत्यु का भय, चाणक्य की चेतावनी हमेशा रखें याद

आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों में जीवन के कठोर सत्य सिखाते हैं। वे कहते हैं कि सफलता पाने के लिए साहस और निडरता जरूरी है। कुछ लोग दो चीजों से इतना डरते हैं कि जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते हैं। चाणक्य की चेतावनी है कि इन दो चीजों से डरने वाला इंसान कभी सफल नहीं होता है। ये दो चीजें हैं – लोक लाज (लोग क्या कहेंगे) और मृत्यु का भय। इनसे डरने से व्यक्ति अवसर चूक जाता है और जीवन में असफल रहता है। चाणक्य नीति सिखाती है कि इन भयों को त्यागकर ही बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। आज के समय में भी यह नीति बहुत प्रासंगिक है। आइए जानते हैं चाणक्य की यह चेतावनी और इसका महत्व।

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लोक लाज का डर

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोक लाज से डरने वाला कभी बड़ा काम नहीं कर पाता है। लोग क्या कहेंगे, इस डर से व्यक्ति नए रास्ते नहीं चुनता है। व्यापार शुरू करने, नौकरी बदलने या सपने पूरे करने में हिचकिचाता है। समाज की बातों से डरकर वह अपनी क्षमता का उपयोग नहीं करता है। चाणक्य की चेतावनी है कि लोक लाज का डर सफलता का सबसे बड़ा शत्रु है। जो लोग इस डर को त्याग देते हैं, वे ही इतिहास बनाते हैं। आज कई लोग इसी डर से रिस्क नहीं लेते और जीवन भर पछताते हैं। चाणक्य नीति सिखाती है कि अपनी बुद्धि और मेहनत पर भरोसा करें, लोगों की बातों पर नहीं। लोक लाज त्यागें, तो सफलता जरूर मिलेगी।

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मृत्यु का भय

मृत्यु से डरने वाला जीते जी मर जाता है। मृत्यु का भय व्यक्ति को जोखिम लेने से रोकता है। बड़ा काम करने, यात्रा करने या नई शुरुआत करने में डर लगता है। चाणक्य की चेतावनी है कि मृत्यु निश्चित है, लेकिन उससे डरकर जीवन व्यर्थ करना मूर्खता है। जो लोग मृत्यु का भय त्याग देते हैं, वे निडर होकर मेहनत करते हैं और सफल होते हैं। योद्धा, व्यापारी या नेता सभी मृत्यु भय त्यागकर ही महान बने हैं। चाणक्य नीति सिखाती है कि मृत्यु को स्वीकार करें और जीवन को पूर्ण जीएं। इस भय से मुक्त होने पर ही बड़ी सफलता मिलती है।

इन भयों से मुक्ति ही सफलता का राज

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोक लाज और मृत्यु भय से डरने वाला कभी सफल नहीं होता है। ये दो भय व्यक्ति को बांधे रखते हैं और अवसर चूक जाते हैं। चाणक्य नीति का सार है कि निडर बनें, साहस रखें। लोग क्या कहेंगे, इसकी चिंता छोड़ें और मृत्यु को निश्चित मानकर जीवन को हर पल जीएं। इन भयों को त्यागने से मन मजबूत होता है और सफलता के द्वार खुलते हैं। चाणक्य की यह चेतावनी आज भी लागू होती है – जो इनसे डरते हैं, वे असफल रहते हैं, जो त्याग देते हैं, वे इतिहास बनाते हैं।

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चाणक्य की नीति अपनाएं – लोक लाज और मृत्यु भय त्यागें तो जीवन में सफलता और सम्मान मिलेगा। साहस से ही बड़ा मुकाम हासिल होता है।

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