कानपुर में खेती के साथ ‘मोती’ से बंपर कमाई, एक सीप से ₹200 तक का मुनाफा, सरकार दे रही है 50% सब्सिडी

कानपुर 

कानपुर के किसानों के लिए नीली क्रांति अब एक नया मोड़ ले रही है। मत्स्य विभाग ने पारंपरिक मछली पालन को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए 'मोती की खेती' (Pearl Farming) को बढ़ावा देने की अनूठी पहल शुरू की है। अब किसान एक ही तालाब में मछलियों के साथ-साथ सीप पालकर लाखों की अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे।

एक तालाब, दोहरा मुनाफा

कानपुर के शंभुआ गांव के किसान देवेंद्र वर्मा ने इस दिशा में मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने तालाब में मछली और सीप पालन का एकीकृत मॉडल अपनाया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अलग से किसी बड़े संसाधन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

ये भी पढ़ें :  अंबेडकरनगर में सीएम योगी ने कृषक दुर्घटना बीमा योजना के 11690 लाभार्थियों को 561 करोड़ की धनराशि की आवंटन

लागत और कमाई

मत्स्य विभाग के अनुसार, मोती उत्पादन मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में होता है: हाफ ब्राउन, डिजाइनर और राउंड मोती। कानपुर में फिलहाल डिजाइनर मोतियों पर फोकस किया जा रहा है जिनकी बाजार में भारी मांग है।

    उत्पादन क्षमता: एक सीप से औसतन 3 मोती तैयार होते हैं।
    अनुमानित आय: एक सीप से किसान लगभग 200 रुपये तक कमा सकते हैं।
    समय सीमा: सीप के भीतर मोती तैयार होने की प्रक्रिया में लगभग 18 महीने का समय लगता है।

50% सरकारी मदद

किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार इस प्रोजेक्ट पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है।

ये भी पढ़ें :  Mr. India बन जाएंगे भारतीय सैनिक... अदृश्य करने वाला कपड़ा देश में तैयार

    उदाहरण: यदि कोई किसान 10 लाख रुपये का प्रोजेक्ट शुरू करता है, जिसमें लगभग 15 हजार सीप डाले जाएंगे, तो उसे सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।

    नोडल एजेंसी: उत्तर प्रदेश में 'मणी एग्रो' को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के सीईओ डॉ. अय्यूब के मुताबिक, कानपुर से अब तक 9 किसानों ने इस अनुदान के लिए आवेदन किया है।

डिजाइनर मोतियों का बढ़ता बाजार

विशेषज्ञों का कहना है कि राउंड मोती की तुलना में डिजाइनर मोतियों को तैयार करना थोड़ा आसान है और आभूषण उद्योग में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। एक सीप की खरीद लागत लगभग 62.14 रुपये आती है, जबकि तैयार होने के बाद इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है।

ये भी पढ़ें :  भारतीय शेयर बाजार ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की संभावित जीत का स्वागत किया

बुंदेलखंड में मिली सफलता के बाद अब कानपुर मंडल के किसानों के लिए यह 'श्वेत क्रांति' आमदनी दोगुनी करने का सबसे ठोस जरिया साबित होने वाली है।

    विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। आने वाले समय में और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है, ताकि मोती उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके- सुनील कुमार, मत्स्य निरीक्षक।

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment