मन, डर, लालच और भ्रम का खेल: आखिर कौन धारण कर सकता है राहु से जुड़ा गोमेद रत्न?

हेसोनाइट, जिसे हिंदी में गोमेद कहा जाता है, राहु से जुड़ा रत्न है. राहु कोई दिखाई देने वाला ग्रह नहीं, बल्कि छाया ग्रह माने जाते हैं. राहु भ्रम, महत्वाकांक्षा, विदेशी प्रभाव, अचानक घटनाएं, जुनून और अलग रास्तों का संकेत देते हैं. गोमेद राहु की बिखरी और भ्रमित ऊर्जा को संभालने और उसे सही दिशा में लगाने के लिए पहना जाता है, खासकर राजनीति, विदेश, अचानक सफलता और भौतिक क्षेत्रों में. राहु अचानक उतार-चढ़ाव, विदेश यात्रा, राजनीति, जन-प्रभाव, तकनीक, नशा, डर, भ्रम और मानसिक पैटर्न से जुड़े माने जाते हैं. पीड़ित राहु चिंता, भ्रम, नशे, कानूनी झंझट, अचानक नुकसान और बदनामी दे सकते हैं. संतुलित राहु तेज दिमाग, नाम और अलग तरह की सफलता देते हैं.

गोमेद गार्नेट परिवार का रत्न है. इसका रंग शहद जैसा भूरा से लेकर लाल-नारंगी (दालचीनी जैसा) होता है. इसमें हल्की तैलीय या धुंधली चमक होती है, जो इसे दूसरे रत्नों से अलग बनाती है. अच्छा गोमेद साफ, एकसार रंग वाला और बिना दरार या काले धब्बों के होना चाहिए. श्रीलंका (सीलोन) का गोमेद सबसे अच्छा माना जाता है.

गोमेद से जुड़े ज्योतिषीय, सांस्कृतिक और व्यावहारिक पहलू

वैदिक ज्योतिष में गोमेद को राहु ग्रह का रत्न माना जाता है. राहु बाकी ग्रहों की तरह सीधा असर नहीं करता, बल्कि यह मन, डर, लालच, भ्रम, अचानक घटनाओं और कर्म से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है. गोमेद का काम भ्रम को बढ़ाना नहीं, बल्कि वहां नियंत्रण और स्पष्टता लाना है, जहां राहु की वजह से उलझन, बेचैनी या अजीब व्यवहार पैदा हो जाता है.

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कर्म और दशा के अनुसार, गोमेद ज्यादातर राहु की महादशा या अंतरदशा में पहनने की सलाह दी जाती है. खासकर तब, जब बिना वजह रुकावटें आ रही हों, अचानक नुकसान हो रहा हो, कोर्टकचहरी के मामले चल रहे हों, लत की समस्या हो या बार-बार डर और घबराहट सताती हो. अगर कुंडली में राहु शुभ हो लेकिन अटका हुआ हो, तो गोमेद विदेश से जुड़े मौके, अनोखी सफलता, टेक्नोलॉजी, राजनीति और जनसंचार जैसे क्षेत्रों में अचानक ब्रेकथ्रू दिला सकता है.

सांस्कृतिक रूप से राहु को छाया ग्रह और ग्रहण से जोड़ा गया है. पुराने समय में गोमेद को धोखा, काला जादू और छुपे हुए दुश्मनों से बचाव के लिए ताबीज की तरह भी पहना जाता था. आध्यात्मिक रूप से गोमेद जरूरत से ज्यादा कल्पनाशक्ति, भ्रम या वहम को जमीन से जोड़ता है. यही वजह है कि यह गहरे मानसिक या तांत्रिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है.

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व्यावहारिक रूप से गोमेद खरीदते समय ध्यान रखें कि उसका रंग शहद या दालचीनी जैसा हो और उसमें हल्की तेलीय चमक हो, कांच जैसी तेज चमक नहीं. आमतौर पर गोमेद 5 से 8 रत्ती तक पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन सही वजन उम्र, शरीर के वजन और कुंडली के अनुसार तय किया जाना चाहिए. कृत्रिम रूप से गर्म किया हुआ, बहुत फीका या बेजान गोमेद नहीं पहनना चाहिए.

एक आम गलती यह होती है कि लोग अचानक पैसा या ताकत पाने के लिए बिना जांच गोमेद पहन लेते हैं. अगर कुंडली में राहु अशुभ हो, तो गोमेद पहनने से वहम, लत, डर या मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है इसलिए गोमेद पहनने से पहले ट्रायल पहनना और किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना बहुत जरूरी है. सही स्थिति में गोमेद ढाल और इंजन दोनों की तरह काम करता है—यह सुरक्षा भी देता है और महत्वाकांक्षा को नियंत्रित तरीके से सफलता की ओर ले जाता है.

गोमेद रत्न पहनने के ज्योतिषीय लाभ

    डर, घबराहट और मानसिक भ्रम कम करेगा
    नकारात्मक ऊर्जा और भ्रम से सुरक्षा देगा
    अचानक करियर और धन लाभ में मदद करेगा
    राजनीति, मीडिया और जन-प्रभाव वाले क्षेत्रों में सफलता देगा
    विदेश यात्रा, विदेश में बसने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहयोग करेगा
    नशे और जुनूनी आदतों को नियंत्रित करने में मदद करेगा
    राहु महादशा चल रही हो या बिना कारण बार-बार समस्याएं आ रही हों, तो गोमेद सलाह दिया जाता है.

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गोमेद पहनने की विधि

    धातु: चांदी या पंचधातु
    उंगली: मध्य उंगली
    हाथ: दाहिना
    दिन: शनिवार शाम
    समय: राहु काल
    मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (108 बार)

गोमेद पहनते समय बरतें ये सावधानियां

    गोमेद हमेशा ट्रायल के बाद ही पहनें
    ट्रायल अवधि: 57 दिन
    डर, बुरे सपने, बीमारी या नुकसान हो तो तुरंत उतार दें
    टूटा, फीका या ट्रीट किया हुआ गोमेद न पहनें
    मोती, माणिक, पुखराज या नीलम के साथ बिना सलाह न पहनें

गोमेद सजावटी नहीं, बल्कि सुधार करने वाला रत्न है. राहु अनुकूल हों तो यह अचानक सफलता और सुरक्षा दे सकता है. राहु प्रतिकूल हों तो भ्रम और अस्थिरता बढ़ा सकता है. इसलिए कुंडली जांच बेहद जरूरी है.

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