मिडल ईस्ट में तनाव चरम पर: ट्रंप ने ईरान की ओर बढ़ाए युद्धपोत, तेहरान का कड़ा जवाब तैयार

नई दिल्ली
मिडल ईस्ट इस समय युद्ध की कगार पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खुली सैन्य टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और देश के भीतर जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर दबाव बढ़ाते हुए युद्धपोतों को ईरान के नजदीक भेजने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने और तेहरान पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए उठाया गया है। लेकिन ईरान ने इस तैनाती को सीधे युद्ध की धमकी करार देते हुए स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह “पूरी ताकत से” जवाब देगा।

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ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी हमले से केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में झुलस सकता है। तेहरान का कहना है कि वह आत्मरक्षा में न केवल जवाबी कार्रवाई करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया होगी, जिससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो सकता है। इस संकट के बीच तुर्किये मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इज़राइल और सऊदी अरब वॉशिंगटन पर दबाव बना रहे हैं कि ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इज़राइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता रहा है, वहीं सऊदी अरब भी क्षेत्र में ईरानी प्रभाव को सीमित करना चाहता है।

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विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में एक भी गलत फैसला या सैन्य चूक पूरे क्षेत्र को पूर्ण पैमाने के युद्ध में धकेल सकती है। पहले से ही गाजा युद्ध, यमन संकट और लेबनान-इज़राइल तनाव से जूझ रहा मध्य पूर्व अब एक और बड़े टकराव की दहलीज पर खड़ा है। ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका की सैन्य धमकियों का उद्देश्य केवल परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान के भीतर जारी सरकार-विरोधी आंदोलनों को कमजोर करना भी है। हालांकि, तेहरान का दावा है कि वह आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर दबाव झेलने के लिए तैयार है।

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