तीन स्कीम और तीन फैक्टर का सहारा: बंगाल में ममता बनर्जी की पकड़ क्यों मजबूत, भाजपा की स्थिति क्या?

नई दिल्ली, कोलकाता
पश्चिम बंगाल में चुनाव का ऐलान हो चुका है। 4 मई को नई सरकार बन जाएगी और उससे पहले 23 और 29 अप्रैल को मतदान होने वाला है। इस इलेक्शन को लेकर भाजपा काफी उत्साहित है और उसे लगता है कि वह 2021 के मुकाबले और मजबूत हो सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार चौथे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरेंगी। ममता बनर्जी को केंद्र सरकार से टकराव और तुनकमिजाजी के लिए जाना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सघन प्रचार किया था और हाईवोल्टेज चुनाव में उन्होंने लगातार तीसरी बार विजय पाई थी। हालांकि वह खुद शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले अपनी सीट नंदीग्राम में हार गई थीं।

ये भी पढ़ें :  Rahul Gandhi 3 जून को एमपी आएंगे, 7 घंटे होगा स्टे, कांग्रेस पदाधिकारियों और विधायकों से करेंगे बात

चुनाव की तारीखें आते ही एक ओपिनियन पोल भी सामने आया है, जिसमें ममता बनर्जी को बढ़त दिखाई गई है। अब सवाल है कि आखिर क्यों टीएमसी और ममता तीन कार्यकालों के बाद भी इतनी मजबूत हैं। इसके पीछे तीन योजनाओं और तीन फैक्टर को वजह माना जा रहा है। ये तीन योजनाएं हैं- लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और युवा साथी। इनके माध्यम से ममता बनर्जी ने महिला, युवा और बुजुर्ग तीनों वर्ग साधने के प्रयास किए हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कोशिश रही है कि SIR को एक बड़ा मुद्दा बना दें और वोटरों के खिलाफ इसे लेकर केंद्र सरकार के प्रति गुस्सा पैदा किया जाए।

ये भी पढ़ें :  MP में बदलेगा राज्यसभा चुनाव का गणित, भाजपा उतार सकती है तीसरा प्रत्याशी, कांग्रेस की 'पक्की' सीट पर टिकी नजर

अब तीन फैक्टरों की बात करें तो पहला यह कि ममता बनर्जी की महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप कांड के मामले में भले ही उनकी पार्टी घेरे में आई थी, लेकिन अब भी महिलाओं का उन पर भरोसा दिखता है। इसके अतिरिक्त वह बांग्ला अस्मिता का सवाल उठाने में भी आगे रही हैं। इसके जरिए उन्होंने अकसर यह कोशिश की है कि किसी भी मामले को दिल्ली बनाम बंगाल की शक्ल दे दी जाए। इसके जरिए उन्होंने बांग्ला राष्ट्रवाद को मजबूत करने के प्रयास किए हैं।

ये भी पढ़ें :  रायपुर ब्रेकिंग : केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बैठक में लिया बड़ा निर्णय, प्रदेश के ESIC अस्पतालों की व्यवस्थाएं होंगी दुरस्त

अब यदि भाजपा की बात करें तो उसके पास बांग्ला अस्मिता वाला कार्ड कमजोर पड़ जाता है। इसके अलावा उसके पास ममता बनर्जी जैसे एक बड़े चेहरे का अभाव है, जो पूरे राज्य में वोटरों को लुभा सके। हालांकि टीचर घोटाला, आरजी कर रेप और मर्डर केस जैसे मामलों ने भाजपा को कुछ मुद्दे दिए हैं। इसके अतिरिक्त बंगाल में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ हमेशा से एक बड़ा मामला रहा है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा इस बार अपने हाथ लगने मुद्दों को किस तरह से भुना पाती है।

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment