रेल यात्रियों को बड़ी राहत: टिकट कैंसिलेशन के नए नियम लागू, जानें क्या बदला

नई दिल्ली
भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए टिकट कैंसिलेशन और बोर्डिंग पॉइंट बदलने के नियमों में अहम बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब यात्रियों को यात्रा से पहले ज्यादा लचीलापन मिलेगा, जिससे उनकी प्लानिंग आसान हो जाएगी। रेलवे इन बदलावों को 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा।

क्या है डिटेल
सबसे बड़ा बदलाव टिकट कैंसिलेशन के नियमों में किया गया है। अब अगर कोई यात्री अपनी कन्फर्म टिकट यात्रा से 72 घंटे पहले कैंसिल करता है, तो उसे अधिकतम रिफंड मिलेगा। यानी सिर्फ एक तय फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज काटा जाएगा और बाकी पैसा वापस मिल जाएगा। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो पहले से यात्रा की योजना बदल लेते हैं।

वहीं, अगर टिकट 72 घंटे से 24 घंटे के बीच कैंसिल की जाती है, तो यात्री को 25 प्रतिशत किराया काटकर रिफंड दिया जाएगा। यह कटौती न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज के अधीन होगी। यानी जितनी देर से टिकट कैंसिल करेंगे, उतना ज्यादा पैसा कटेगा। रेलवे का कहना है कि इससे सीटों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

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अगर कोई यात्री यात्रा से 24 घंटे से 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करता है, तो उसे 50 प्रतिशत किराया काटकर ही रिफंड मिलेगा। यानी इस समय सीमा में कैंसिलेशन महंगा पड़ेगा। वहीं सबसे सख्त नियम आखिरी समय के लिए रखा गया है—अगर ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय बचा है, तो टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा।

प्रस्थान से पहले समय के आधार पर टिकट रद्द करने के नियम
प्रस्थान से पहले का समय – रद्दीकरण नियम
72 घंटे से अधिक पहले – अधिकतम रिफंड मिलेगा, केवल प्रति यात्री फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज कटेगा
72 घंटे से 24 घंटे के बीच – किराए का 25% कटेगा (न्यूनतम चार्ज लागू)
24 घंटे से 8 घंटे के बीच – किराए का 50% कटेगा (न्यूनतम चार्ज लागू)
8 घंटे से कम समय – पहले कोई रिफंड नहीं मिलेगा
ये नए नियम 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे।

बोर्डिंग प्वाइंट बदलने में बड़ी राहत
अब यात्री ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यह सुविधा खासतौर पर उन बड़े शहरों में उपयोगी होगी जहां एक से अधिक रेलवे स्टेशन हैं। इससे यात्री अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी नजदीकी स्टेशन से यात्रा शुरू कर सकेंगे। फिलहाल, पहले यह सुविधा केवल चार्ट तैयार होने से पहले तक ही सीमित थी।

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टाउट्स पर लगेगी लगाम
रेल मंत्रीअश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह फैसला टिकट दलालों (टाउट्स) की गतिविधियों के विश्लेषण के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि टाउट्स पहले बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे और बाद में अनबिके टिकटों को कैंसिल कराकर रिफंड हासिल कर लेते थे। नए सख्त नियमों से इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगेगी।

पहले क्या थे कैंसिलेशन नियम?
संशोधन से पहले रेलवे के टिकट रद्द करने के नियम कम समय सीमा और क्लास-आधारित फ्लैट चार्ज पर आधारित थे:
48 घंटे से पहले रद्द करने पर – प्रति यात्री फ्लैट चार्ज कटता था
एग्जीक्यूटिव क्लास: ₹240 + GST
एसी चेयर कार: ₹180 + GST
48 घंटे से 12 घंटे के बीच
किराए का 25% कटता था (न्यूनतम चार्ज लागू)
12 घंटे से 4 घंटे के बीच- किराए का 50% कटता था (न्यूनतम चार्ज लागू)

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4 घंटे से कम समय पर
कोई रिफंड नहीं मिलता था, यदि टिकट रद्द या TDR फाइल नहीं किया गया हो।
वेटिंग और आंशिक कन्फर्म टिकट के नियम

वेटिंग टिकट
4 घंटे पहले तक कैंसिल करने पर ₹20 + GST प्रति यात्री कटता था। चार्ट बनने के बाद भी टिकट वेटिंग रहने पर ऑटोमेटिक कैंसिल होकर पूरा रिफंड मिलता था

आंशिक कन्फर्म टिकट
4 घंटे पहले तक कैंसिल करने पर ₹20 + GST कटता था
कुछ मामलों में चार्ट बनने के बाद, यदि कोई यात्री यात्रा नहीं करता, तो पूरा रिफंड मिल सकता था

विशेष परिस्थितियों में रिफंड
    ट्रेन पूरी तरह रद्द होने पर
    ट्रेन 3 घंटे से अधिक देरी से चलने पर

इन स्थितियों में पूरा रिफंड दिया जाता था, बशर्ते समय पर TDR फाइल किया गया हो। बता दें कि रेलवे के ये नए बदलाव जहां यात्रियों को अधिक सुविधा देंगे, वहीं टिकट बुकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने और दुरुपयोग को रोकने में भी मददगार साबित होंगे।

 

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