UAE के इस फैसले से भारत की किस्मत चमकेगी, डॉलर के बजाय रुपये में मिलेगा तेल

नई दिल्ली

 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा UAE के OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries) से बाहर निकलने की खबर को वैश्विक तेल बाजार में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसे UAE का ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहा जा रहा है, क्योंकि इससे वह अपनी तेल उत्पादन नीति पर अधिक स्वतंत्रता पा सकता है। लेकिन, इस फैसले का सबसे दिलचस्प असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है। आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि इसका भारत को कितना लाभ मिलेगा?

अब तक OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries) के सदस्य देशों को उत्पादन कोटा और कीमतों को लेकर संगठन के नियमों का पालन करना पड़ता था। UAE के बाहर आने के बाद वह अपनी शर्तों पर उत्पादन बढ़ा सकता है और नए व्यापारिक समझौते कर सकता है। यही वह प्वाइंट है, जहां भारत के लिए एक बड़ा अवसर बनता दिख रहा है।

ये भी पढ़ें :  दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत ट्रेन, 150 KM रैपिड रेल कॉरिडोर से सफर होगा आसान

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर डॉलर आधारित भुगतान का भारी दबाव रहता है। अगर UAE भारत के साथ रुपये में तेल व्यापार करने के लिए सहमत होता है, तो यह भारत के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा। इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) मजबूत होगा और डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है।

ये भी पढ़ें :  छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग राष्ट्रीय “अंगना म शिक्षा” कार्यक्रम को मिला वर्ष 2022 का स्कॉच अवार्ड

रुपये में तेल खरीदने का मतलब है कि भारत को हर बार डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे रुपया स्थिर रह सकता है। साथ ही यह कदम भारत और UAE के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं और यह पहल उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। वैश्विक तेल बाजार बेहद संवेदनशील होता है और OPEC से बाहर निकलने के बाद UAE को कीमतों और मांग के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये में व्यापार को बड़े स्तर पर लागू करना भी आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए वित्तीय ढांचे और भरोसेमंद सिस्टम की जरूरत होती है।

ये भी पढ़ें :  क्षिप्रा नदी को निर्मल एवं प्रवाहमान बनाये रखने सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के लिए 614 करोड़ 53 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

फिर भी अगर यह रणनीति सफल होती है, तो यह न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी एक नया मॉडल बन सकती है। कुल मिलाकर UAE का यह कदम आने वाले समय में तेल की राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों को नई दिशा दे सकता है, जिसमें भारत एक बड़ा लाभार्थी बनकर उभर सकता है।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment