भारतीय संत नीम करोली बाबा की सादगी और सेवा भाव से प्रभावित हुई दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों की सोच और नेतृत्व शैली

नीम करोली बाबा एक भारतीय संत और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने अपनी सादगी, ज्ञान और प्रेम व सेवा की सीख से दुनिया के कई बड़े लोगों को प्रभावित किया. माना जाता है कि टेक दुनिया के दिग्गज जैसे स्टीव जॉब्स (Steve Jobs), मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) और जैक डोर्सी (Jack Dorsey) भी उनसे या उनके आश्रम से किसी न किसी तरह जुड़े रहे. इन लोगों का कहना है कि वहां का अनुभव उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ जैसा था, जिसने उनकी सोच और काम करने के तरीके को बदल दिया.  नीम करोली बाबा की सीख से इन तीनों ने एक मुकाम प्राप्त किया. नीम करौली बाबा की सीख आज भी लोगों को जीवन में शांति, सही दिशा और सकारात्मक सोच देने के लिए याद की जाती है.

स्टीव जॉब्स (Steve Jobs)
स्टीव जॉब्स (Steve Jobs), जो Apple के को-फाउंडर थे, उन्होंने 1970 के दशक के बीच में उत्तराखंड के कैंची धाम स्थित नीम करोली बाबा के आश्रम का दौरा किया था. उस समय वे अपने जीवन और करियर को लेकर कुछ उलझन में थे और मानसिक शांति और सही दिशा की तलाश में भारत आए थे. हालांकि नीम करौली बाबा का निधन 1973 में हो चुका था, लेकिन जॉब्स ने आश्रम में कुछ समय बिताया और वहां के शांत माहौल को महसूस किया और बाबा के भक्तों से बातचीत की.

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इस यात्रा का उन पर गहरा असर पड़ा. बाद में उन्होंने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें सादगी और फोकस का महत्व समझाया, जो आगे चलकर एप्पल (Apple) की डिजाइन सोच का बड़ा हिस्सा बना. जॉब्स ने इस अनुभव को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर किया और मार्क जकरबर्ग जैसे लोगों को भी उस जगह जाने की सलाह दी.

मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg)
साल 2015 में मार्क जकरबर्ग ने बताया था कि उन्होंने स्टीव जॉब्स की सलाह पर नीम करौली बाबा के आश्रम का दौरा किया था. उस समय फेसबुक (Facebook) शुरुआती दौर में था और कई मुश्किलों का सामना कर रहा था, जिससे जकरबर्ग को कंपनी की दिशा को लेकर थोड़ा शक होने लगा था. ऐसे में स्टीव जॉब्स ने उन्हें सलाह दी कि वे भारत जाकर कैंची धाम आश्रम जाएं, ताकि उन्हें मानसिक शांति और सही सोच मिल सके.

जकरबर्ग वहां गए और कुछ समय आश्रम में बिताया. वहां का शांत माहौल और अनुभव ने उन्हें अंदर से सुकून और एक नया उद्देश्य महसूस कराया. इस यात्रा के बाद उनका फेसबुक (Facebook) के मिशन- दुनिया को जोड़ने, पर भरोसा और मजबूत हो गया. बाद में उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें मुश्किल समय में आगे बढ़ने का हौसला और आत्मविश्वास दिया.

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जैक डोर्सी (Jack Dorsey)
ट्विटर (अब X) के को-फाउंडर और पूर्व CEO जैक डोर्सी भी नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से प्रभावित माने जाते हैं, खासकर ध्यान और माइंडफुलनेस की सोच से. हालांकि उन्होंने कभी खुलकर यह नहीं बताया कि वे सीधे आश्रम गए थे, लेकिन उन्होंने कई बार कहा है कि भारतीय आध्यात्मिकता और ध्यान की परंपरा ने उनके जीवन और काम करने के तरीके पर असर डाला है.

डोर्सी नियमित रूप से मेडिटेशन (ध्यान) करते हैं, जो नीम करोली बाबा की उस सीख से जुड़ा माना जाता है जिसमें मन की शांति और आत्म-जागरूकता पर जोर दिया जाता है. इसी वजह से उनका लीडरशिप स्टाइल भी ज्यादा शांत, संतुलित और फोकस्ड माना जाता है, जिससे उन्हें ट्विटर (Twitter) और स्क्वायर (Square) जैसी बड़ी कंपनियों को संभालने में मदद मिली.

नीम करोली बाबा की शिक्षाएं
नीम करोली बाबा की शिक्षाएं बहुत सरल और जीवन से जुड़ी हुई थीं. वे कहते थे कि हर इंसान से प्रेम और सम्मान से पेश आना चाहिए. जीवन का असली मतलब दूसरों की मदद करना है. उनके अनुसार, किसी से कुछ उम्मीद किए बिना सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है.

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वैश्विक स्तर पर नीम करोली बाबा की लोकप्रियता
नीम करोली बाबा की लोकप्रियता सिर्फ टेक दुनिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सीख पूरी दुनिया में मानी जाती है. उनका आश्रम आज भी विदेशों से आने वाले लोगों, सेलेब्रिटीज, बिजनेस करने वालों और आध्यात्मिक शांति चाहने वालों को आकर्षित करता है. उनकी शिक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने में राम दास (Ram Das) की किताब Miracle of Love ने भी बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें उन्होंने नीम करोली बाबा के साथ अपने अनुभव साझा किए हैं.

उनकी सोच खासकर टेक लीडर्स को इसलिए पसंद आती है क्योंकि यह तेज और तनाव भरी लाइफ के बीच शांति, फोकस और इंसानियत सिखाती है. इसी वजह से कई लोग उनकी शिक्षाओं को अपने काम और जीवन में अपनाने की कोशिश करते हैं ताकि वे ज्यादा बेहतर सोच, रचनात्मकता और दूसरों के प्रति समझ विकसित कर सकें. इसके अलावा भारत में भी कई बड़े लोग नीम करोली बाबा की आस्था से जुड़े हैं. जैसे क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी, बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा, दोनों ने अपने परिवार के साथ कैंची धाम आश्रम का दौरा किया था और वहां आशीर्वाद लिया था.

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