Supreme Court: ‘वक्त बदल गया है, बच्चों को क्लास में जलील नहीं कर सकते टीचर’, सुनवाई में तीखी बहस

 नई द‍िल्ली 

एक छात्र की आत्महत्या के मामले में एक प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद नाटकीय बहस देखने को मिली। 

प्रोफेसर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने तर्क दिया कि कक्षा में कथित तौर पर किया गया अपमान आत्महत्या से एक महीने पहले हुआ था, इसलिए इसे मौत का तात्कालिक या सीधा कारण (Proximate Cause) नहीं माना जा सकता। 

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इसके बजाय, वरिष्ठ वकील ने छात्र की मौत से ठीक एक घंटे पहले हुई एक घटना की ओर इशारा किया जिसमें छात्र ने कथित तौर पर एक ऐप से लोन लिया था, बिना अनुमति के उसने एक प्रोफेसर का नाम गारंटर के रूप में इस्तेमाल किया था, और लोन रिकवरी एजेंट उसे परेशान कर रहे थे। 

सख्त शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के प्रति आगाह करते हुए वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि एक शिक्षक कभी-कभी छात्र के हित में बहुत अधिक सख्त हो सकता है और इस तरह के आचरण पर मुकदमा चलाने से उन शिक्षकों पर 'बुरा असर' पड़ेगा जो अनुशासन लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। 

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जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि समय बदल गया है. शायद हमारे दिनों में पिटाई करना आम बात थी… अब चीजें बदल गई हैं। 

जंस्टिस मेहता ने आगे टिप्पणी की कि यदि किसी छात्र को कक्षा में उसके सहपाठियों के सामने अपमानित किया जाता है, तो छात्र के मानस (Psyche) पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और समाज में ये संदेश जाना ही चाहिए कि शिक्षक छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते। 

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