योगी सरकार ने यूपी में किया खेल सुविधाओं का अभूतपूर्व विकास, महानगरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक सरकार ने खड़ा किया स्पोर्ट्स का बुनियादी ढांचा
मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय में तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन व विशेषज्ञ
लखनऊ
पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ी है। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में खेल सुविधाओं का ऐसा अभूतपूर्व विकास हुआ है, जिसने महानगरों से लेकर गांवों तक खेलों की मजबूत बुनियाद खड़ी कर दी है। यह परिवर्तन केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है।
सरकार की "एक मंडल-एक स्पोर्ट्स कॉलेज" की परिकल्पना ने हर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर दिया है। मेरठ में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय भविष्य के चैंपियनों और खेल विशेषज्ञों को तैयार करने का केंद्र बन रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य खेल नीति-2023 ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सुरक्षा प्रदान करते हुए खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही प्रदेश में एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना भी की गई है।
योगी सरकार में खेल क्रांति का उदय: गांव से ग्लोबल मंच तक यूपी का दबदबा
खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने पुरस्कार राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। ओलंपिक में एकल वर्ग के खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक पर ₹06 करोड़, रजत पदक पर 04 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹02 करोड़ का पुरस्कार और टीम गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹02 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹01 करोड़ का पुरस्कार है। जबकि एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक पर ₹03 करोड़, रजत पदक पर ₹डेढ़ करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹75 लाख का प्रोत्साहन निर्धारित है। इसके अलावा कॉमनवेल्थ अथवा विश्वकप से जुड़ी प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक पर ₹1.5 करोड़, रजत पदक पर ₹75 लाख तथा कांस्य पदक जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार निर्धारित है। वहीं ओलंपिक गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रतिभाग किये जाने पर प्रोत्साहन स्वरूप ₹10-10 लाख और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा एशियन गेम्स में प्रतिभाग करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों को ₹05-05 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पहल युवाओं के मन में खेलों के प्रति लगाव और समर्पण को और मजबूत करेगी।
मजबूत बुनियाद, सुनहरा भविष्य: खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश
ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए "एक जनपद एक खेल" योजना से 75 जनपदों में ₹25,000/- प्रतिमाह की दर से प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान एवं 30 खिलाड़ियों को किट एवं खेल सामग्री की व्यवस्था की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21 खेलों की टीमों में 434 बालक एवं 355 बालिका समेत कुल 789 खिलाड़ियों को किट वितरित करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। गोरखपुर और वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जबकि प्रदेशभर में स्टेडियम, क्रीड़ा हॉल, स्वीमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार, इस बात का प्रमाण है कि खेल अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा।
मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय से सशक्त होता उत्तर प्रदेश
इसके साथ ही, मेजर ध्यानचंद डिजिटल हॉकी संग्रहालय और एकलव्य क्रीड़ा कोष जैसी पहलें खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत प्रदेश में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ी न केवल मैदान में बल्कि जीवन में भी सफल बन सकें। आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल खेलों में भाग लेने वाला नहीं, बल्कि जीतने और देश का नाम रोशन करने वाला बन रहा है। यह मजबूत, स्वस्थ और समर्थ युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की सच्ची आधारशिला है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।


