लेशी सिंह के समर्थन में नीतीश का दमदार प्रचार, संतोष कुशवाहा पर साधा निशाना

पटना 
बिहार की सियासत में अब टक्कर दिलचस्प हो गई है। एक तरफ जेडीयू की वरिष्ठ मंत्री लेशी सिंह के लिए प्रचार करने खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धमदाहा (पूर्णिया) के मैदान में उतरे, तो दूसरी तरफ उनके पुराने साथी और अब विरोधी बने संतोष कुशवाहा आरजेडी के टिकट पर उसी सीट से चुनावी मैदान में हैं। सीमांचल की ये जंग अब सिर्फ सीट की नहीं, सियासी प्रतिष्ठा की भी हो गई है। धमदाहा में बुधवार दोपहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ठाकुरबाड़ी मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वक्त में बिहार देश के विकसित राज्यों में शुमार होगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य को केंद्र सरकार से भरपूर सहयोग मिल रहा है और अब बिहार के हर इलाके में विकास की गूंज सुनाई दे रही है।
 
नीतीश कुमार ने कहा, “पहले बिहार में शाम होते ही लोग घरों में बंद हो जाते थे, डर और झगड़े का माहौल था। अब शांति, भाईचारा और प्रेम है। हमने महिलाओं को 35% आरक्षण दिया, नौकरियां दीं, पेंशन बढ़ाई और हर वर्ग के विकास के लिए काम किया।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “2030 तक एक करोड़ युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य है। पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू हो चुका है, मखाना बोर्ड बन चुका है, और धमदाहा से फोर लेन रोड बनने जा रहा है।”

ये भी पढ़ें :  छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने झारखंड के गिरीडीह लोकसभा क्षेत्र में संभाली चुनाव प्रचार की कमान, भ्रष्टाचार के हर आलम का यही आलम होगा : राम विचार नेताम

संतोश कुशवाहा के खिलाफ प्रचार कर रहे नीतीश कुमार
उन्होंने मंच से जेडीयू प्रत्याशी लेशी सिंह के पक्ष में वोट मांगते हुए कहा, “लेशी सिंह ने धमदाहा में जो काम किया है, वो किसी से छिपा नहीं। इन्हें जीताना विकास की रफ्तार को बनाए रखना है।” मंच पर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, पूर्व मंत्री शहनवाज हुसैन और साबिर अली जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे।

ये भी पढ़ें :  पुरंदर मिश्रा जब रिक्शे पर निकले तो लोगों ने कहा- जोरदार, जय हो..., रायपुर उत्तर विस सीट से बीजेपी प्रत्याशी ने शक्ति प्रदर्शन के साथ दाखिल किया नामांकन

गौरतलब है कि धमदाहा सीट पर मुकाबला अब जेडीयू की लेशी सिंह बनाम आरजेडी के संतोष कुशवाहा के बीच है। लेशी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती हैं, जबकि संतोष कुशवाहा सीमांचल में अपनी जातीय पकड़ और पुराने सियासी रसूख के कारण एक मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें :  अपनी हार सामने देखकर भाजपा कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या करवा रही कांग्रेस : अरुण साव

 

Share

Leave a Comment