सोसाइटी की लिफ्ट में महिला का प्राइवेट वीडियो वायरल, जानें कैसे पहचानें हिडन या स्पाई कैमरा

मुंबई

मुंबई के अंधेरी में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. एक 36 साल की महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उनका आरोप है कि की लिफ्ट में लगे CCTV का एक निजी वीडियो अचानक वायरल हो गया। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला लिफ्ट में एक व्यक्ति के साथ थी और दोनों को यह पता नहीं था कि कैमरा उनकी रिकॉर्डिंग कर रहा है. बाद में यह वीडियो किसी ने CCTV बैकअप सिस्टम से निकालकर सोसाइटी और सोशल मीडिया में फैलाना शुरू कर दिया, जिसके बाद महिला को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। 

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि CCTV सिस्टम तक पहुंच रखने वाले व्यक्ति ने ही बैकअप से वीडियो निकाला और उसे शेयर किया. इस मामले में IT एक्ट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

CCTV की सिक्योरिटी पर सवाल
यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है. यह एक बड़ा सवाल भी उठाती है कि आज के समय में जब हर जगह कैमरे लगे हैं, तो हमारी प्राइवेसी कितनी सुरक्षित है.

CCTV या कैमरा सिस्टम सुरक्षित तरीके से मैनेज नहीं किया जाए तो उसका गलत इस्तेमाल बहुत आसानी से हो सकता है. कई बार छोटी गलती जैसे सॉफ्टवेयर अपडेट ना करने की वजह से भी कैमरा हैक हो सकता है. 

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होटल और ट्रायल रूम में हिडेन कैमरा का खतरा
आजकल होटल, ट्रायल रूम, चेंजिंग रूम और रेंटल अपार्टमेंट में छिपे कैमरों की खबरें भी सामने आती रहती हैं. टेक्नोलॉजी छोटी और सस्ती होने की वजह से ऐसे स्पाई कैमरे बनाना आसान हो गया है जिन्हें स्मोक डिटेक्टर, चार्जर, घड़ी, एयर वेंट या दीवार के छोटे छेद में छिपाया जा सकता है.

कई बार लोग सोचते हैं कि चेंजिंग रूम या ट्रायल रूम पूरी तरह सुरक्षित जगह है. लेकिन अगर समय समय पर ट्रायल रूम और होटल के लीक्ड फुटेज की खबरें आती रहती हैं.

कैसे पता लगाएं हिडेन कैमरा कहां है? 
ऐसे में सबसे पहला सवाल यही है कि किसी कमरे में छिपा कैमरा है या नहीं, यह कैसे पहचाना जाए? 

कमरे में घुसते ही सबसे पहले आसपास की चीजों को ध्यान से देखना जरूरी है. अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अजीब जगह लगा हुआ है या किसी चीज में छोटा गोल छेद दिखाई देता है तो उस पर ध्यान देना चाहिए.

स्पाई कैमरे अक्सर ऐसी जगहों पर लगाए जाते हैं जहां से पूरा कमरा दिखाई दे सके, जैसे दीवार के कोने, छत के पास लगे डिवाइस या स्मोक डिटेक्टर.

मोबाइल फोन से पता करें
मोबाइल फोन भी छिपे कैमरे पहचानने में मदद कर सकता है. अगर कमरे की लाइट बंद करके मोबाइल की टॉर्च दीवारों और उपकरणों पर डाली जाए तो कैमरे का लेंस अक्सर रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है. अगर कहीं छोटा सा चमकता हुआ बिंदु दिखाई दे तो वहां कैमरा हो सकता है.

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कुछ स्पाई कैमरे इन्फ्रारेड लाइट का इस्तेमाल करते हैं ताकि वे कम रोशनी में भी रिकॉर्डिंग कर सकें. यह रोशनी इंसानी आंख से दिखाई नहीं देती लेकिन मोबाइल कैमरा उसे पकड़ सकता है. अगर मोबाइल कैमरे से कमरे को स्कैन किया जाए और स्क्रीन पर कहीं छोटी चमकती रोशनी दिखे तो वहां कैमरा हो सकता है.

WiFI स्कैनिंग से भी जान सकते हैं
इसके अलावा कई कैमरे इंटरनेट से जुड़े होते हैं. ऐसे में अगर आप कमरे के WiFi नेटवर्क से जुड़े हैं तो नेटवर्क स्कैनिंग ऐप से यह देखा जा सकता है कि कितने डिवाइस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. अगर कोई संदिग्ध डिवाइस दिखाई दे तो सावधान रहने की जरूरत होती है.

एक और तरीका है कमरे के शीशों की जांच करना. कई बार टू-वे मिरर का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें एक तरफ से आईना दिखाई देता है लेकिन दूसरी तरफ से कमरे के अंदर देखा जा सकता है. ऐसे शीशे की पहचान करने के लिए लोग उंगली टेस्ट भी करते हैं.

सिक्योरिटी बेहद जरूरी
हालांकि सिर्फ छिपे कैमरे ही खतरा नहीं हैं. कई बार कैमरे तो सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं लेकिन बाद में उनकी रिकॉर्डिंग का गलत इस्तेमाल किया जाता है. अंधेरी का मामला इसी बात का उदाहरण है जहां एक निजी पल CCTV में रिकॉर्ड हुआ और फिर सिस्टम से निकालकर वायरल कर दिया गया.

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साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि CCTV सिस्टम को ठीक से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. अगर बैकअप सर्वर या रिकॉर्डिंग सिस्टम तक बहुत ज्यादा लोगों की पहुंच हो तो फुटेज चोरी या लीक होने का खतरा बढ़ जाता है.

स्पाई कैम का खतरा होने पर तुरंत रिकॉर्ड कर लें
अगर किसी जगह आपको स्पाई कैमरा होने का शक हो तो उसे तुरंत छेड़ना नहीं चाहिए. पहले उसकी फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर लें ताकि सबूत सुरक्षित रहे. इसके बाद होटल मैनेजमेंट, स्टोर स्टाफ या संबंधित लोगों को जानकारी दें. जरूरत पड़े तो पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है.

आज के डिजिटल दौर में कैमरे सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन अगर उनका गलत इस्तेमाल हो जाए तो वही कैमरे किसी की प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. इसलिए चाहे होटल का कमरा हो, ट्रायल रूम हो या चेंजिंग रूम, कुछ मिनट का सावधानी भरा चेक कई बार आपकी प्राइवेसी को सुरक्षित रख सकता है.

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