नई दिल्ली
पारदर्शिता, जवाबदेही और जन-भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक कदम उठाते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली की उन सभी सड़कों पर क्यूआर/बार कोड युक्त डिस्प्ले बोर्ड लगाने की शुरुआत करने जा रही है, जहां पर सड़कों को फिर से बनाने यानी सड़कों की स्ट्रेंथनिंग और री-कार्पेटिंग का कार्य किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से अब नागरिकों को सिर्फ जानकारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि सीधे अपनी प्रतिक्रिया देने का अवसर भी मिलेगा।
क्यूआर कोड से मिलेंगी कैसी जानकारियां?
नए निर्देशों के अनुसार किसी भी सड़क कार्य के पूरा होने के सात दिनों के भीतर बस क्यू शेल्टर व प्रमुख चौराहों और अधिक भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर ये डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि अधिकतम लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। इन क्यूआर/बार कोड को स्कैन करने पर नागरिकों को संबंधित परिियोजना की पूरी जानकारी मिलेगी, जिसमें सड़क का नाम और लंबाई, अंतिम स्ट्रेंथनिंग की तारीख, ठेकेदार/एजेंसी का विवरण, स्वीकृत लागत जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी।
600 किलोमीटर सड़कें बनेंगी नई स्कीम से
इसके साथ ही क्यूआर सिस्टम में एक इंटीग्रेटेड फीडबैक मैकेनिज्म भी जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से नागरिक सड़क कार्य की गुणवत्ता को लेकर अपनी शिकायत, सुझाव या अनुभव सीधे विभाग तक पहुंचा सकेंगे। यहां बता दें कि दिल्ली सरकार ने इस योजना के बारे में कुछ माह पहले घोषणा की थी, जिस पर अब काम शुरू होने जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के पास 1440 किलोमीटर लंबी सड़कों हैं, जिनमें से 600 किलोमीटर सड़कों को नई स्कीम के तहत बनाया जाना है।
यह पहल जन-भागीदारी की दिशा में अहम कदम-प्रवेश वर्मा
"पारदर्शिता का मतलब सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनना भी है। इस पहल के माध्यम से नागरिक न केवल सड़क कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि अपनी प्रतिक्रिया भी सीधे दे सकेंगे। इससे व्यवस्था अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनेगी। सभी डिस्प्ले बोर्ड के लिए एक समान डिजाइन और सख्त मेंटेनेंस प्रोटोकाल तय किए हैं। सभी डिवीजनों को निर्देश दिए गए हैं कि बोर्ड स्पष्ट रूप से दिखाई दें, क्यूआर कोड हर समय कार्यरत रहें और किसी भी नए कार्य के बाद जानकारी तुरंत अपडेट की जाए।"


