बिलासपुर. हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल मूक-बधिर होने पर किसी गवाह की बात को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों से दी गई जानकारी को भी कानूनी तौर पर मौखिक साक्ष्य माना जाता है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने डिवीजन बेंच ने मूक-बधिर युवती के साथ दुष्कर्म करने वाले को मरते दम तक उम्र कैद की सजा सुनाई है। आरोपी वर्तमान में जेल में…
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