माओवादी हिंसा के बाद बदलती तस्वीर: बोधघाट में जंगल का अर्थशास्त्र ले सकता है नई दिशा

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में इन दिनों महुआ की खुशबू फैली हुई है। सुबह होते ही आदिवासी महिलाएं और बच्चे टोकरी लेकर पेड़ों के नीचे गिरे फूल बीनने निकल पड़ते हैं। यही महुआ कई परिवारों के लिए नकदी का बड़ा सहारा है। कुछ महीनों बाद बारिश आएगी और खेतों में धान, कोदो व कोसरा बोया जाएगा। फसल कटते ही खेत फिर खाली हो जाएंगे और ग्रामीणों के हाथ भी। यही कारण है कि प्रकृति से संपन्न होने के बावजूद बस्तर का बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर बना…

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