साल के अंतिम दिन साय कैबिनेट की अहम बैठक, कई बड़े प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में साल के आखिरी दिन मंत्रिपरिषद की बैठक होने वाली है. मंत्रालय, महानदी भवन में 31 दिसंबर को सुबह 11 बजे यह बैठक बुलाई गई है, जिसमें विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी. साथ ही कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे. कैबिनेट को लेकर मुख्यसचिव विकास शील ने सभी विभाग प्रमुखों को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिए हैं. 10 दिसंबर की कैबिनेट बैठक के फैसले इससे पहले 10 दिसंबर को साय कैबिनेट की बैठक हुई थी. इसमें कई अहम प्रस्तावों पर मुहर…

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किसानों से दलहन-तिलहन उपार्जन की केन्द्र ने दी स्वीकृति

  खरीफ में उपार्जन के लिए 425 करोड़ रूपए मंजूर     रायपुर, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत प्राइस सपोर्ट स्कीम में छत्तीसगढ़ को दलहन और तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के बीच हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन में दलहन-तिलहन उपार्जन के लिए 425 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी…

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साय सरकार के दो साल: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की बड़ी उपलब्धियाँ, धान खरीदी सीमा 15 से बढ़ाकर 21 क्विंटल

 रायपुर  साय सरकार के दो साल पूरे होने पर अलग-अलग विभागों के आला अधिकारी विभागीय उपलब्धियों की जानकारी दे रहे हैं. इस कड़ी में सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सीमा को 15 क्विंटल को बढ़ाकर 21 क्विंटल किया है. सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि उपार्जन केंद्र में 25 लाख 49 हजार किसानों के माध्यम से धान का उपार्जन किया है. 25 लाख किसानों को…

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मिट्टी की झोपड़ी से पक्के घर तक : सन्ना गांव की महंती बेक की कहानी

रायपुर, जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के सन्ना गांव की महंती बेक का वर्षों पुराना सपना, पक्के घर में रहने का आखिरकार साकार होने जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके पति सुनील के नाम से पक्के मकान की स्वीकृति मिली है और निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मिट्टी और टिन की झोपड़ी में दुश्वारियों से जूझते परिवार के लिए अब स्थायित्व और सम्मान का अहसास मिलने जा रहा है।     महंती बेक कहती हैं कि “कभी बरसात में छत टपकती थी, सर्दी-गर्मी में झोपड़ी में…

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