जैसलमेर की जमीन में मिले 64 पानी के भंडार, सूखा प्रभावित इलाकों को मिलेगा राहत

जैसलमेर 

भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों से 2021-22 में राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में किए गए हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे (Heliborne Geophysical Survey) के नतीजे अब सामने आ रहे हैं. इस सर्वे से जैसलमेर जिले में 64 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां भूजल उपलब्ध हो सकता है.

इनमें से कई जगहें ऐसी हैं जहां पहले के पारंपरिक तरीकों से पानी नहीं मिल पाया था. यह खोज पश्चिमी राजस्थान के सूखे इलाकों में पानी की समस्या का स्थाई समाधान दे सकती है.

सर्वे का विवरण

हेलीबोर्न सर्वे हेलिकॉप्टर से किया जाता है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जियोफिजिकल तकनीकों का इस्तेमाल कर जमीन के नीचे 500 मीटर तक की जानकारी ली जाती है. यह तरीका तेज, सटीक और बड़े क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है. सर्वे से भूजल के स्रोत, उनकी गहराई, मीठे और खारे पानी के क्षेत्र, प्राचीन नदी मार्ग (पेलियोचैनल) और कृत्रिम रिचार्ज के लिए उपयुक्त जगहों की जानकारी मिलती है.

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यह सर्वे केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), जल शक्ति मंत्रालय और CSIR-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI), हैदराबाद ने किया. राजस्थान में कुल 66,810 वर्ग किमी क्षेत्र कवर किया गया, जिसमें जैसलमेर, जोधपुर और सीकर जैसे प्राथमिकता वाले जिले शामिल हैं. जैसलमेर जिले में करीब 15,000 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्वे किया गया.

पोकरण क्षेत्र में बड़ी सफलता

वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, पोखरण तहसील का ज्यादातर हिस्सा भूजल की दृष्टि से कमजोर माना जाता है. लेकिन हेलीबोर्न सर्वे से फलसूंड से छायन, धुडसर से राजगढ़ तक के इलाकों में भूजल भंडार मिलने की संभावना जगी है. कुल 64 स्थानों पर भूजल की उपलब्धता बताई गई है. इनमें से अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां पेयजल की किल्लत आम है. पहले जांच में पानी नहीं मिला था.

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फलसूंड इलाका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भूजल मिलना एक बड़ी उपलब्धि होगी. हालांकि पोकरण और भनियाणा में नहर का पानी उपलब्ध है, लेकिन इन स्थानों पर नलकूप बनाकर आपात स्थिति में लोगों को पानी मिल सकेगा.

सर्वे के फायदे

    भूजल के नए स्रोत ढूंढने में मदद.
    कृत्रिम रिचार्ज (जमीन में पानी भरने) के लिए सही जगहों की पहचान.
    जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान.
    सांकड़ा ब्लॉक जैसे शुष्क इलाकों में उच्च-रिजॉल्यूशन एक्विफर मैपिंग से जल संकट से राहत मिलेगी.

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यह सर्वे राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग प्रोग्राम (NAQUIM) का हिस्सा है, जो राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 3.88 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करेगा. इससे जल संरक्षण और सतत विकास में बड़ी मदद मिलेगी. 

डॉ. इणखिया ने कहा कि यह रिपोर्ट जैसलमेर जिला कलेक्टर और राज्य भूजल बोर्ड को भेजी गई है. अब इन स्थानों पर आगे जांच और नलकूप निर्माण से लाखों लोगों को फायदा होगा.

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