अमेरिका में जगुआर लैंड रोवर का एक्‍सपोर्ट रोक टाटा ने दिए संकेत?

नई दिल्‍ली.
ब्रिटेन की जानी-मानी कार कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने अमेरिका को अपनी लग्जरी कारों का एक्‍सपोर्ट रोक दिया है। जेएलआर टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के नए टैरिफ के कारण लिया गया है। 7 अप्रैल से यह फैसला लागू होगा। ट्रंप सरकार ने कारों पर 25% का इम्पोर्ट टैक्स लगाया है। इससे जेएलआर को बड़ा झटका लगा है। कंपनी को अपनी योजना बदलनी पड़ रही है। भारत की टाटा मोटर्स के लिए जेएलआर बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले साल मार्च में जेएलआर ने दुनियाभर में लगभग 4,30,000 गाड़ियां बेचीं। इनमें से लगभग 1,07,500 गाड़ियां उत्तरी अमेरिका में बेची गईं। टाटा मोटर्स ने वर्ष 2008 में फोर्ड मोटर्स से जेएलआर का अधिग्रहण किया था।

जेएलआर ने अमेरिका को गाड़ियां भेजना इसलिए रोका है क्योंकि अमेरिका ने इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। इससे कंपनी को नुकसान हो रहा है। कंपनी को पहले से ही वित्तीय समस्याएं हो रही हैं। जनवरी में कंपनी का मुनाफा 17% गिर गया था। इसकी वजह मांग में कमी और खर्चों में बढ़ोतरी है।

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अमेरिका में कारों पर 25% इम्पोर्ट ड्यूटी
अमेरिका में कारों पर 25% इम्पोर्ट ड्यूटी 3 अप्रैल से लागू हो गई है। जेएलआर अब खर्चों को कम करने के तरीके खोज रही है। ब्रिटेन में कंपनी के 38,000 कर्मचारी हैं। कंपनी ट्रंप के ट्रेड वॉर से होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर रही है।

2 अप्रैल को जेएलआर ने एक बयान में कहा, 'हमारे लग्जरी ब्रांड पूरी दुनिया में पसंद किए जाते हैं और हमारा कारोबार मजबूत है। हम बाजार की बदलती स्थितियों के अनुसार काम करने के आदी हैं। हमारी प्राथमिकता अब दुनिया भर में अपने ग्राहकों को सेवाएं देना और अमेरिका के साथ नए व्यापार नियमों का पालन करना है।'

ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत
जेएलआर का यह फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत है। ट्रंप की रेसिप्रोकल ट्रेड पॉलिसी के कारण ऑटो कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन बदलनी पड़ रही है। टाटा मोटर्स की जेएलआर अब मुश्किल दौर से गुजर रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय कार बिक्री की रणनीतियां बदल सकती हैं।

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जेएलआर के सामने कई चुनौतियां हैं। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से गाड़ियों की कीमत बढ़ जाएगी। इससे अमेरिका में जेएलआर की गाड़ियों की मांग कम हो सकती है। कंपनी को अब नए बाजार खोजने होंगे और खर्चों को कम करना होगा।

यह देखना दिलचस्प होगा कि जेएलआर इस मुश्किल परिस्थिति से कैसे निपटती है। कंपनी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा ताकि वह बाजार में बनी रहे। ट्रंप के फैसले से न केवल जेएलआर, बल्कि अन्य ऑटो कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है। जेएलआर के फैसले से यह पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कितना जटिल है। एक देश की पॉलिसी दूसरे देशों पर भी असर डालती है। कंपनियों को हमेशा बदलती हुई परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।

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मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार
जेएलआर का कहना है कि वह मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार है। कंपनी अपने ग्राहकों को अच्छी सेवाएं देना जारी रखेगी। जेएलआर को उम्मीद है कि वह जल्द ही इस मुश्किल दौर से बाहर निकल जाएगी।

कंपनी प्रवक्ता ने कहा, 'अमेरिका जेएलआर के लक्जरी ब्रांडों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। हम अपने व्यापारिक भागीदारों के साथ नई व्यापारिक शर्तों की दिशा में काम कर रहे हैं। हम अपनी अल्पकालिक कार्रवाइयों को लागू कर रहे हैं। इसमें अप्रैल में निर्यात खेप रोकना भी शामिल है। हम अपनी मध्यावधि से लेकर दीर्घावधि तक की योजनाएं बना रहे हैं।' प्रवक्ता ने कहा, 'हमारी प्राथमिकताएं अब दुनिया भर में अपने ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने और अमेरिका की नई व्यापारिक शर्तों को संबोधित करने की हैं।'

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