मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा में ऐलान किया है कि वह राज्य की स्वायत्ता के लिए एक कमेटी गठित करेंगे

तमिलनाडु
राज्यपाल से तनातनी के बीच तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य को स्वायत्त बनाने का प्रस्ताव पेश कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए 75 साल पूरे हो गए हैं। हमारे देश में अलग-अलग भाषा, जाति और संस्कृति के लोग रहते हैं। हम सब मिलजुलकर रहते हैं। डॉ. आंबेडकर ने देश की राजनीति और प्रशासन की प्रणाली को इस तरह बनाया कि सभी के हितों की रक्षा की जा सके।

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स्टालिन ने कहा कि एक-एक कर राज्यों के अधिकार छीने जा रहे हैं। वहीं राज्य के लोग अपने मौलिक अधिकारों के लिए केंद्र से लड़ रहे हैं। हम किसी तरह अपने भाषाई अधिकार की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे में राज्य तभी विका कर सकते हैं तो उनके पास सभी शक्तियां हों। एमके स्टालिन ने कहा कि स्वायत्ता की सिफारिश करने के लिए बनाई जाने वाली कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ करेंगे। इसके अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक वरदान शेट्टी और नागराजन इस कमेटी में शामिल होंगे। कमेटी को जनवरी 2026 तक का समय दिया गया है। इस समय सीमा में कमेटी को अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। वहीं अंतिम रिपोर्ट 2028 तक सौंपनी है।

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एमके स्टालिन ने विधानसभा में केंद्र सरकार पर नीट को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के छात्रों का भविष्य खराब करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि किसी की भाषाई स्वतंत्रता बहुत जरूरी है। वहीं नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा नीति के जरिए केंद्र सरकार तमिलनाडु के लोगों पर हिंदी थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू करने से इनकार करने पर केंद्र ने राज्य का 2500 करोड़ का फंड ही रोक दिया।

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