RBI ने जून की मौद्रिक नीति बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट को 0.50% घटाकर 5.50% कर दिया

नई दिल्ली
अगर आप होम लोन चुका रहे हैं या नया लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून की मौद्रिक नीति बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट को 0.50% घटाकर 5.50% कर दिया है। इस बदलाव से बैंकों की लोन देने की लागत घटेगी, और इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलने वाला है।

क्या असर होगा EMI पर?
RBI के इस फैसले के बाद अगर बैंक भी ब्याज दर में 0.50% की कटौती करते हैं, तो होम लोन की EMI में अच्छी खासी राहत मिल सकती है। समझते हैं इसे एक उदाहरण से:
    लोन अमाउंट: ₹30 लाख
     लोन अवधि: 20 साल
    पुरानी ब्याज दर: 8.75%
    नई संभावित ब्याज दर: 8.25%

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  हर महीने EMI में बचत: ₹949
 20 साल में कुल बचत: ₹2,27,844

EMI कम करें या लोन जल्दी निपटाएं?
बैंक आमतौर पर ब्याज दर घटने के बाद दो विकल्प देते हैं:
    EMI घटाएं: आपकी जेब पर हर महीने कम बोझ पड़ेगा
    लोन अवधि घटाएं: EMI वही रहेगी, लेकिन लोन जल्दी खत्म हो जाएगा

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उदाहरण के लिए, अगर आप EMI को ₹26,511 पर ही बनाए रखते हैं, तो आपकी लोन अवधि 240 महीनों से घटकर 230 महीनों की रह जाएगी। यानी आप 10 महीने जल्दी कर्ज मुक्त हो सकते हैं।

बैंकों पर रेपो रेट का असर कैसे होता है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को फंड उधार देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों की फंडिंग लागत भी कम हो जाती है। इससे उन्हें ग्राहकों को सस्ता लोन देना आसान हो जाता है। अक्टूबर 2019 से लागू नियमों के अनुसार, बैंकों को अपने फ्लोटिंग रेट लोन को बाहरी बेंचमार्क (जैसे रेपो रेट) से जोड़ना होता है। इसलिए रेपो रेट में बदलाव का असर सीधे होम लोन की दरों पर पड़ता है।

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