हनुमान जी की अनोखी जुगत से चैन से सोते है भगवान जगन्नाथ, जाने कैसे

हमारा देश विविधताओं का देश है. धर्म और आस्था इसकी धुरी हैं. भक्तों की ऐसी ही आस्था का केंद्र है पुरी का जगन्नाथ मंदिर, जिसमें ना जाने कितने सुलझे अनसुलझे किस्से जुड़े हुए हैं. इसके पीछे की पौराणिक कथाएं लोगों को आज भी हैरानी में डाल देती है. इतना ही नहीं मंदिर के रहस्य भी आपको आस्था की तरफ झुकने पर मजबूर कर देंगे. ऐसी ही इस मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा है जिसे आप मंदिर का रहस्य भी कह सकते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि मंदिर के समुद्र से घिरा होने के बावजूद भी मंदिर परिसर में समुद्र की लहरों की आवाज नहीं पहुंचती, जबकि मंदिर से बाहर निकलते ही आपको उसके लहरों की आवाज सुनाई दे जायेगी.

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जगन्नाथ मंदिर और हनुमान जी की कथा
इसके पीछे एक पौराणिक कथा है. जगन्नाथ भगवान के इस मंदिर की यह कथा बजरंगबली हनुमान से जुड़ी हुई है. इस कथा के अनुसार भगवान जगन्नाथ समुद्र की आवाज से परेशान हो गए थे और वह चैन से सो नहीं पा रहे थे. भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी को समुद्र को नियंत्रित करने का काम सौंपा था. ऐसे में यह काम भी हनुमान जी के जिम्मे में ही था. हनुमान जी ने समुद्र से शांत हो जाने कि प्रार्थना की लेकिन समुद्र ने कहा कि मैं ऐसा नहीं कर सकता यह मेरे बस में नहीं, पवन के वेग के साथ मेरी आवाज भी मंदिर तक पहुंचेगी. आप चाहे तो अपने पिता से अनुरोध कर सकते हैं कि वह विपरीत दिशा में बहें, तो यह आवाज मंदिर तक नहीं पहुंचेगी.

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हनुमान जी की जुगत
हनुमान जी ने वैसा ही किया उन्होंने पवन देव का आह्वान किया और कहा, क्या आप उल्टी दिशा में बह सकते हैं, पवन देव ने कहा कि मेरे लिए यह संभव नहीं है लेकिन तुम चाहो तो ऐसा कर सकते हो, तुम अपनी तेजी से एक वायु चक्र बना सकते हो. हनुमान जी ने वैसा ही किया हनुमान जी मंदिर के चारों तरफ इतनी तेजी और वेग के साथ चक्कर लगाने लगे कि वहां एक वायु चक्र बन गया जिससे पवन देव को उसी वेग में बहना पड़ा. इसी वेग की वजह से समुद्र की आवाज भी मंदिर तक नहीं पहुंच पायी. वायु के वेग ने समुद्र की आवाज को वही रोक लिया.

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फिर चैन से सो सके भगवान जगन्नाथ
इसके बाद, समुद्र की आवाज मंदिर में प्रवेश कर पाने के कारण भगवान जगन्नाथ चैन से सो सके, और हनुमान जी की इस जुगत ने काम कर दिया. भगवान हनुमान की यह जुगत, आज भी इस मंदिर में रहस्य की तरह काम कर रही है. क्योंकि मंदिर के अंदर समुद्र की तेज लहरों की आवाज बिल्कुल सुनाई नहीं देती.

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