बजरी माफिया के खिलाफ नागौर के रियांबड़ी के लोग गुस्से में, पर्यावरण के लिए पूरा शहर बंद

नागौर

नागौर के रियांबड़ी के लोग गुस्से में हैं। वे अपने शहर के पर्यावरण को बचाना चाहते हैं। शहर के चारों तरफ की गौचर भूमि पर बजरी खनन हो रहा है। लोगों में गुस्सा इसलिए है क्योंकि अवैध खनन को रोकने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। जब लोगों की बात प्रशासन ने नहीं सुनी तो उन्होंने आंदोलन की राह पकड़ ली है। शहर को अनिश्चितकालीन के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही लोग प्रदर्शन भी कर रहे हैं। बाजारों की सभी दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियाँ पूरी तरह से ठप  हैं।

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शहर के प्रमुख संगठनों और नागरिकों ने मिलकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अनियंत्रित बजरी खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है, साथ ही क्षेत्र की जलधाराओं और खेती योग्य भूमि पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। लोगों का जीवन और स्वास्थ्य भी खतरे में आ गया है। वहीं भारी वाहनों से हादसे होने का भी डर लगा रहता हैं।

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आंदोलनकारियों ने तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें पहली रियांबड़ी क्षेत्र में गौचर भूमि से बजरी खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए। वहीं दूसरी मांग पर्यावरण संरक्षण के नियमों का शहर और इसके आस-पास सख्ती से पालन कराया जाए। तीसरी मांगखनन प्रभावित क्षेत्र के लोगों को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शहर का बंद जारी रहेगा। रियांबड़ी का यह आंदोलन अब अन्य गांवों और कस्बों तक फैलने भी लगा है।

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