‘नफरत का शिकार बना मेरा शहर’ – कन्नड़ महिला ने बेंगलुरु की आपबीती सुनाई

बेंगलुरु 
भारत का प्रौद्योगिकी केंद्र माने जाने वाला बेंगलुरु एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई टेक्नोलॉजिकल उपलब्धि नहीं, बल्कि एक कन्नड़ महिला की रेडिट पर साझा की गई भावुक पोस्ट है, जिसने लाखों दिलों को झकझोर दिया है।

7 साल के अनुभव ने बदल दी सोच
बेंगलुरु में पिछले सात वर्षों से रह रही इस महिला ने लिखा है कि उसने अब शहर की छवि बचाने की कोशिशें छोड़ दी हैं, क्योंकि वह मानने लगी है कि यह शहर वाकई में उस नफरत और कटुता का पात्र बन चुका है, जो उसे मिल रही है।

BMTC बस में अपमान का अनुभव
महिला ने लिखा कि कैसे एक BMTC बस में उसके साथ कंडक्टर द्वारा सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाया गया, सिर्फ इसलिए कि उसने हाथ में फोन पकड़े हुए दरवाजा नॉक किया। यह घटना उसके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली थी।

ये भी पढ़ें :  पीएम मोदी का दौरा टलने से अब थोड़ा और समय लगेगा, कश्मीर जाने वाली वंदे भारत में FREE में सफर कर सकेंगे ऐसे यात्री

ऑटो और मेट्रो कर्मचारियों का व्यवहार
उसने दावा किया कि यह घटना अकेली नहीं थी। आए दिन उसे ऑटो चालकों, मेट्रो कर्मचारियों और अन्य सार्वजनिक सेवाकर्मियों से रूखा और असभ्य बर्ताव झेलना पड़ता है। कई बार उसे ऐसा महसूस होता है कि ये लोग अपने काम से खिन्न और चिड़चिड़े हो चुके हैं।

भाषा पर आधारित व्यवहार में फर्क
महिला के अनुसार, अगर आप अंग्रेज़ी या अन्य गैर-कन्नड़ भाषाओं में बात करते हैं, तो लोग अधिक रूखा व्यवहार करते हैं, लेकिन जब आप कन्नड़ में बोलते हैं, तो लहजा अचानक विनम्र हो जाता है। इससे सामाजिक व्यवहार में एक गहरा विरोधाभास झलकता है।

ये भी पढ़ें :  चमोली में व्यापारियों की मुस्लिमों को चेतावनी, 31 दिसंबर के बाद मकान मालिकों पर लगेगा 10 हजार जुर्माना

'अधिकार और असुरक्षा' का तनावपूर्ण मिश्रण
उसका मानना है कि बेंगलुरु के भीतर आर्थिक असमानता, तेजी से हो रहा विकास, और संस्कृति में बदलाव लोगों को भीतर से असुरक्षित और आक्रोशित बना रहा है। यही वजह है कि शहर धीरे-धीरे अपनी सांस्कृतिक आत्मा खोता जा रहा है।

"विनम्रता की झलक एयरपोर्ट पर मिलती है"
पोस्ट में लिखा गया है कि कन्नड़ लोगों की गर्मजोशी यदि कहीं दिखाई देती है, तो वह है एयरपोर्ट, जहां वे बहुत विनम्रता से मुसाफिरों का स्वागत करते हैं। यह स्थिति शहर के भीतर और बाहर के व्यवहार में विरोधाभास को उजागर करती है।

ये भी पढ़ें :  दिल्ली पुलिस की वर्दी पर लगा बॉडी कैमरा क्यों चर्चा में? जानें कैसे करता है काम और क्यों हुआ विवाद

सामाजिक मीडिया पर मचा बवाल
यह पोस्ट वायरल हो गई है और कई लोगों ने महिला की बातों से सहमति जताई है। कुछ ने लिखा कि सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत लोग आज के समय में लगातार चिड़चिड़े और असहिष्णु होते जा रहे हैं, जो शहरी जीवन की थकावट और तनाव का परिणाम है।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment