ईरान पर हमले का विरोध पड़ा भारी: इजरायल समर्थक US सांसद ने पूर्व सैनिक के हाथ तोड़े

ईरान
ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले का विरोध अमेरिका में भी हो रहा है। इस बीच, यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति  की सुनवाई के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में एक पूर्व मरीन ने प्रदर्शन किया। इस दौरान झड़प में एक अमेरिकी सांसद ने उसका हाथ तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घायल प्रदर्शनकारी की पहचान ब्रायन मैकगिनेस के रूप में हुई है, जो 2000 से 2004 तक यूनाइटेड स्टेट्स मरीन कॉर्प्स में सार्जेंट रह चुके हैं।

मैकगिनेस सुनवाई के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। जब यूएस कैपिटल पुलिस ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, तो उन्होंने दरवाजे के फ्रेम को पकड़ लिया। इसी दौरान हाथ फंसने से उनका हाथ टूट गया।

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सीनेटर भी हटाने में शामिल
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों के साथ अमेरिकी सांसद टिम शीही भी प्रदर्शनकारी पूर्व सैनिक को बाहर निकालने में मदद करते नजर आ रहे हैं। जब झड़प चल रही थी, तब कमरे में मौजूद लोगों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लोग कह रहे हैं, "उसका हाथ… उसका हाथ… ओह माय गॉड!” दूसरी तरफ, पुलिस अधिकारी बार-बार प्रदर्शनकारी से दरवाजा छोड़ने के लिए कहते हुए सुनाई देते हैं। इसी दौरान पूर्व मरीन मैकगिनेस का हाथ टूट जाता है।
“कोई इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता”

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बाहर ले जाए जाने के दौरान मैकगिनेस चिल्लाते हुए कहते सुने गए, “कोई भी सैनिक इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता।” यह बयान पश्चिम एशिया में जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर उनके विरोध को दर्शाता है। दूसरी तरफ इस घटना के बाद सीनेटर शीही ने सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने लिखा कि कैपिटल पुलिस एक असंतुलित प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी और वह स्थिति को शांत करने में मदद कर रहे थे।

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उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति टकराव के इरादे से कैपिटल आया था और उसे वही मिला। उम्मीद है कि उसे मदद मिलेगी और आगे कोई हिंसा नहीं होगी।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है और अमेरिका में ईरान नीति तथा युद्ध विरोधी भावनाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना अमेरिकी राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर गहरी असहमति को भी दर्शाती है।

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