ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर और अंतिम किसान तक पहुंचे कृषि नवाचार के फायदे

‘डिजिटल-कृषि’ नवाचार से सीमांत किसानों को सशक्त बनाने की पहल
आईआईटी इंदौर में हुई ‘एग्रीकनेक्ट’ कार्यशाला

भोपाल

कृषि नवाचार के फायदे ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर और अंतिम किसान तक पहुंचने चाहिए तभी खेती को लाभ का सौदा बनाकर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा। डिजिटल कृषि के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आईआईटी इंदौर में सी-डैक पुणे, आईसीएआर-एनएसआरआई इंदौर और आईसीएआर-सीआईएई भोपाल के सहयोग से दो दिवसीय एग्रीकनेक्ट कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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कार्य़शाला में एमईआईटीवाई के संयुक्त सचिव श्री के. के. सिंह ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने में डिजिटल कृषि नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्याशाला के तकनीकी सत्रों में फसल सुधार, सटीक कृषि, ड्रोन अनुप्रयोग, और एआई-संचालित कीट व रोग निदान जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया। आईसीएआर-आईएएसआरआई, नई दिल्ली के डॉ. अनिल राय ने डिजिटल डिसीडन-सपोर्ट-सिस्टम को अपनाये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे सीमित संसाधनों वाले किसानों को सही निर्णय लेने में सहयोग मिलेगा।

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कार्यशाला में गैर-सरकारी संगठन, उद्योग प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) एवं कामदार ग्रुप और हाईमीडिया लैब जैसे स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इंटरैक्टिव गोलमेज बैठकों में नकली उर्वरकों की पहचान, किफायती तकनीकों, और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

पीआई, एग्रीहब, आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर अरुणा तिवारी ने कृषि नवाचारों को गांव-गांव और प्रत्येक किसान तक पहुंचाये जाने की आवश्यकता जताई। कार्यशाला में आये प्रतिभागियों सहमित जताई कि एग्रीहब मॉडल, कृषि नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और किसान सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय अधो-संरचना के रूप में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

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