RSS के 100 साल: CJI की मां को मिला स्पेशल निमंत्रण, भाई ने किया चौंकाने वाला खुलासा!

नई दिल्ली 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अमरावती में 5 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई की माताजी को निमंत्रण मिला है. मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के छोटे भाई ने कहा कि उनकी मां को आरएसएस के कार्यक्रम का निमंत्रण मिला है. उन्हें यह कार्यक्रम अटेंड करना चाहिए, जबकि कमलबाई गवई को लेकर एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें वो हिंदू धर्म की आइडियोलॉजी के खिलाफ बात करती नजर आ रही है.

हालांकि ये पत्र कमलबाई गवई का लिखा है या नहीं. इसकी पुष्टि नहीं हुई है, जबकि उनके बेटे राजेंद्र गवई की मानें तो उनकी मां ये कार्यक्रम अटेंड करने वाली हैं. कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र भी सार्वजनिक हुआ है, जिसमें कमलबाई गवई का नाम लिखा हुआ है. 5 अक्टूबर को अमरावती में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का विजयादशमी और आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी वर्ष का विशेष कार्यक्रम होने जा रहा है.

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क्या कार्यक्रम में शिरकत करेंगी CJI की मां?
सूत्रों का कहना है कि कमलताई गवई ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से साफ इंकार किया है और वो खुद को अंबेडकरी विचारधारा और भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्ध बताती हैं और किसी भी परिस्थिति में संघ के आयोजन में हिस्सा नहीं लेंगी. वहीं उनके पुत्र और रिपब्लिकन पार्टी के नेता राजेंद्र गवई ने दावा किया है कि उनकी मां ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और वे कार्यक्रम में उपस्थित होंगी.

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राजेंद्र गवई ने कहा कि संघ का कार्यक्रम अमरावती में हो रहा है और उसका निमंत्रण मेरी माताजी को मिला है, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है. पहले भी नागपुर में संघ के मुख्य कार्यक्रमों में दिवंगत रिपब्लिकन पार्टी के नेता राजाभाऊ खोब्रागडे और दादासाहेब गवई शामिल हो चुके हैं. दादासाहेब गवई के इंदिरा गांधी और विदर्भ के नेता गंगाधर फडणवीस से भी घनिष्ठ संबंध थे.

जानें CJI के भाई ने क्या कहा
उन्होंने आगे कहा, रिश्ते भाईचारे के हैं, लेकिन विचारधाराएं अलग-अलग हैं. किसी कार्यक्रम में जाने का मतलब यह नहीं कि विचारधारा बदल जाएगी. हमारी मित्रता रहेगी, पर विचारधारा हमारी पक्की है.

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वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेंद्र गवई ने कहा कि, भूषणजी गवई बड़े पद पर पहुंचे हैं, इस कारण विरोधी जानबूझकर टीका-टिप्पणी कर रहे हैं. कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं, लेकिन हम उस पर अधिक ध्यान नहीं दे रहे. उन्होंने कहा कि आईसाहेब ने जो निर्णय लिया है, मैं उनके साथ मजबूती से खड़ा हूं. हम सर्वधर्मसमभाव को मानने वाले हैं और यह रास्ता हमने पहले भी अपनाया था, आज भी मानते हैं और भविष्य में भी मानते रहेंगे.

 

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