भोपाल AIIMS में 250 रुपये में चमत्कार: गर्भनाल से लौटाई 13 मरीजों की आंखों की रोशनी

भोपाल
 गर्भनाल, गर्भस्थ शिशु के लिए रक्षा कवच का काम करता है. जबकि शिशु का जन्म होने के बाद इस कवच को वेस्टेज समझ के फेंक दिया जाता था, लेकिन एम्स भोपाल के डाक्टर अब इस इस गर्भनाल की झिल्लियों से आंखे खो चुके मरीजों के जीवन में फिर से रोशनी लाने का काम कर रहे हैं. दीपावली के दौरान कार्बाइड गन से घायल 13 लोग आंखों का इलाज कराने के लिए एम्स भोपाल पहुंचे थे. जहां डाक्टरों ने एमनियोटिक मेम्ब्रेन यानि गर्भनाल की झिल्लियों का उपयोग कर उनकी आंखों की रोशनी लौटाई.

घाव भरने और पारदर्शिता बनाए रखने में करती है मदद

एम्स भोपाल के सर्जन डॉक्टर समेंद्र खुरकुर ने बताया कि "नवजात शिशुओं के जन्म के बाद उनके गर्भनाल को पहले फेंक दिया जाता था, लेकिन अब यही आंखों की गंभीर समस्याओं में दवाई का काम कर रही है. गर्भनाल की जीवित झिल्ली घाव भरने में मदद करती है. इसके साथ ही आंखों की पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद करती है. वहीं निजी अस्पतालों में जहां इस तरह के इलाज में 40 से 50 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं. भोपाल एम्स में आयुषमान कार्डधारकों का यह इलाज निशुल्क किया जा रहा है. जबकि जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उनसे भी केवल 250 रुपए लिए जा रहे हैं.

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मरीजों की आंखों का 80 प्रतिशत विजन लौटा

डॉक्टर समेंद्र खुरकुर ने बताया किए मनियोटिक मेम्ब्रेन तकनीकी ऐसे लोगों के लिए कारगर है, जिनकी आंखें केमिकल के पटाखों से खराब हुई है. उनके कार्नियल अल्सर या संक्रमण की स्थिति में और एलर्जिक सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों के इलाज में बेहतर रिजल्ट मिलता है. इसके साथ ही इसका इस्तेमाल ट्रामा या सर्जरी के बाद ऊतकों की बेहतर रिकवरी के लिए भी किया जाता है. उन्होंने बताया कि एम्स भोपाल में जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनका विजन 80 प्रतिशत से अधिक लौट चुका है. इनमें अधिकतर मरीजों की आंखें कार्बाइड गन से डैमेज हुई थी.

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इस तरह किया जाता है एमनियोटिक मेम्ब्रेन से इलाज

आंखो में चोट, इंफेक्शन या पटाखों से आंखों की ऊपरी सतह झुलसने पर यदि दवाइयों से घाव ठीक नहीं होते तो एमनियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्टिंग की जाती है. सबसे पहले डिलेवरी के बाद नवजात शिशु को इससे अलग किया जाता है. फिर इसे स्टरलाइज करने के बाद नार्मल स्लाइन से साफ किया जाता है. इसके बाद इसे एंटीबायोटिक या बीटाडीन सॉल्यूशन से साफ किया जाता है. इसके बाद आंखों के क्षतिग्रस्त हिस्से को साफ कर टांकों के माध्यम से इसकी ग्राफ्टिंग की जाती है. इससे घाव जल्द भरते हैं और मरीज की रिकवरी जल्दी होती है.

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जानिए क्या होता है एमनियोटिक मेम्ब्रेन

एमनियोटिक मेम्ब्रेन एक पतली और मजबूत झिल्ली होती है, जो गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को घेरे रहती है. विशेष रूप से, यह एमिनियोटिक थैली की आंतरिक या भीतरी परत होती है, जो भ्रूण को धारण करने वाला आवरण होती है. एमनियोटिक थैली में एमनियोटिक द्रव और एक बाहरी परत भी होती है, जिसे कोरियोन कहा जाता है. ये संरचनाएं मिलकर भ्रूण के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण बनाती हैं, ताकि वह बढ़ सके और विकसित हो सके.

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