इस देश की सेना ने लगाया एंड्रॉयड पर बैन, अब सैनिकों के हाथ में सिर्फ iPhone

इजरायल

इजरायल की सेना (IDF) ने अपने बड़े अफसरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब लेफ्टिनेंट कर्नल और उससे ऊपर के रैंक के सभी कमांडर सिर्फ आईफोन ही इस्तेमाल कर सकेंगे। एंड्रॉयड फोन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सेना का कहना है कि एंड्रॉयड फोन में हैकिंग का खतरा ज्यादा है। दुश्मन आसानी से इन फोन्स को हैक करके निजी जानकारी चुरा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में इजरायल के सैनिकों को 'हनी ट्रैप' का शिकार बनाया गया है। इसमें खूबसूरत लड़कियों के फेक अकाउंट से चैट शुरू की जाती है और फिर फोन में वायरस डाल दिया जाता है। इससे सैनिकों की लोकेशन और दूसरी जरूरी जानकारी लीक हो जाती है।

सिर्फ आईफोन ही क्यों?
यह खबर इजरायल के आर्मी रेडियो ने सबसे पहले दी, जिसे जेरूसलम पोस्ट ने भी छापा। रिपोर्ट में बताया गया कि आईफोन को सेना ज्यादा सुरक्षित मान रही है क्योंकि यह एक क्लोज सिस्टम है। इसमें बाहर के ऐप आसानी से नहीं डाले जा सकते। ऐपल कंपनी हर चीज पर सख्ती से नजर रखती है। जबकि एंड्रॉयड में हजारों कंपनियां फोन बनाती हैं और कोई भी ऐप डाउनलोड करना आसान है। इसी वजह से वायरस और स्पाईवेयर का खतरा ज्यादा रहता है।

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इजरायल को गूगल पिक्सल भी रास नहीं आया
हाल ही में गूगल ने बड़ा दावा किया था कि उसका पिक्सल फोन आईफोन से भी ज्यादा सुरक्षित है। अमेरिका की सेना ने भी पिक्सल फोन को मंजूरी दे दी थी। गूगल ने कहा था कि उसके फोन में खास सुरक्षा फीचर हैं जो सरकारी काम के लिए बेस्ट हैं। लेकिन इजरायल की सेना ने इन दावों को नजरअंदाज कर दिया और सिर्फ आईफोन को चुना।

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पहले से चल रही थी तैयारी
यह फैसला एकदम से नहीं लिया गया। पहले भी सेना ने अपने अफसरों को ट्रेनिंग दी थी कि फेक मैसेज और कॉल से कैसे बचें। हिजबुल्लाह जैसे दुश्मन संगठनों के हनी ट्रैप का ड्रामा भी करवाया गया था ताकि सैनिक सतर्क रहें। अब फोन का नियम और सख्त कर दिया गया है।

निजी इस्तेमाल में छूट, सरकारी काम में सख्ती
नए नियम के मुताबिक एंड्रॉयड फोन पूरी तरह बैन नहीं हुए हैं। अफसर अपना निजी फोन एंड्रॉयड ही रख सकते हैं। लेकिन सेना के किसी भी काम, मीटिंग या गोपनीय बात के लिए सिर्फ आईफोन इस्तेमाल करना जरूरी होगा। सेना की तरफ से दिए जाने वाले फोन भी अब सिर्फ आईफोन ही होंगे।

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एंड्रॉयड ने बहुत सुधार किया, फिर भी पीछे
पिछले दो साल में गूगल ने एंड्रॉयड को काफी सुरक्षित बनाया है। अब अगले साल से बाहर के ऐप डालने पर और सख्ती आने वाली है। फिर भी आईफोन का बंद इकोसिस्टम अभी भी सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। खासकर सेनाओं और सरकारी कामों के लिए।

एंड्रॉयड से कहीं आगे है आईफोन?
यह फैसला सिर्फ इजरायल की सेना तक सीमित नहीं है। दुनिया की दूसरी सेनाएं और खुफिया एजेंसियां भी देख रही हैं। अगर कोई देश अपने टॉप अफसरों के लिए सिर्फ आईफोन चुनता है तो यह ऐपल के लिए बड़ी जीत है और गूगल के लिए झटका। स्मार्टफोन की सुरक्षा की जंग में आईफोन अभी आगे निकल गया लगता है।

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