विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में नारीशक्ति और जलशक्ति की निर्णायक भूमिका : मंत्री श्रीमती संपतिया उइके

भोपाल 
मध्यप्रदेश विधानसभा के छठवीं विधानसभा के अष्टम सत्र के दौरान "विकसित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध मध्यप्रदेश” विषय पर हुई चर्चा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने महिला सशक्तिकरण और पेयजल सुरक्षा को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताते हुए सरकार की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों के स्पष्ट रोडमैप को सदन के समक्ष रखा।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि विकास की वास्तविक परिभाषा केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह इस बात से तय होती है कि समाज का अंतिम व्यक्ति, विशेषकर महिलाएँ, बच्चे, जनजातीय समुदाय और कमजोर वर्ग कितना सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और पेयजल सुरक्षा किसी भी संवेदनशील और उत्तरदायी शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मंत्री श्रीमती उइके ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा किए गए ठोस प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि आंगनवाड़ी सेवाओं में पारदर्शी एवं मेरिट आधारित ऑनलाइन चयन प्रक्रिया लागू कर मध्यप्रदेश ने देश में एक नई मिसाल कायम की है। इस प्रक्रिया के तहत 19 हजार 477 रिक्त पदों के विरुद्ध 3 लाख 99 हजार 331 आवेदन प्राप्त हुए जिसमें से अब तक 12 हजार 75 नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। शेष पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था महिला सशक्तिकरण के साथ साथ सुशासन और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है।

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मंत्री श्रीमती उइके ने लाड़ली बहना योजना को महिला आर्थिक आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक निर्णयों में सहभागिता सुदृढ़ हुई है। इससे लगभग एक करोड़ 26 लाख महिलाएँ लाभ उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से 24 घंटे सातों दिन निःशुल्क सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

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पेयजल सुरक्षा पर बोलते हुए मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। इसी सामाजिक यथार्थ को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन को जन-आंदोलन के रूप में लागू किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जहां केवल 12.11 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध था, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 72.79 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। प्रदेश के 23 हजार से अधिक गांवों को "हर घर जल ग्राम" घोषित किया जा चुका है।

जनजातीय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के गांवों में जल जीवन मिशन की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 70 प्रतिशत से अधिक परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। "जल सखी" मॉडल के माध्यम से महिलाओं को जन योजनाओं के संचालन, संधारण और जल गुणवत्ता परीक्षण में निर्णायक भूमिका दी गई है, जिससे महिला नेतृत्व को नई पहचान मिली है।

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मंत्री श्रीमती उइके ने आगामी तीन वर्षों के रोडमैप की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना, जल स्रोतों का संरक्षण-पुनर्भरण, तकनीक आधारित निगरानी तथा महिलाओं को नीति निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका देना है।

मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने नारीशक्ति और जलशक्ति को केंद्र में रखकर विकास की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए सभी मिलकर रचनात्मक और परिणामोन्मुख सहयोग करें।

 

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