हनुमान जी पर बाण चलाने से पहले भरत क्यों कांप उठे थे? जानिए रामायण की अनसुनी कथा

रामायण के कई प्रसंग हमें जीवन की बड़ी सीख देते हैं. ऐसा ही एक प्रसंग तब आता है जब लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान जी पूरा द्रोणागिरि पर्वत उठाकर लंका ले जा रहे थे. इस दौरान जब वे अयोध्या के ऊपर से गुजरे, तो भरत के साथ उनका एक छोटा सा टकराव हुआ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भरत ने हनुमान जी को मारने के लिए मारक बाण का इस्तेमाल क्यों नहीं किया था? आइए जानते हैं.

जब अयोध्या के आसमान में छाया अंधेरा

युद्ध भूमि में लक्ष्मण जी मूर्छित थे और सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी पहुंचानी जरूरी थी. हनुमान जी विशाल पर्वत लेकर वायु मार्ग से तेजी से उड़ रहे थे. जब वे अयोध्या के ऊपर से निकले, तो उनकी विशाल परछाईं को देखकर भरत को लगा कि शायद कोई मायावी राक्षस अयोध्या पर हमला करने या उसे नष्ट करने के लिए कोई पहाड़ ले जा रहा है.

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क्यों चलाया बिना फल वाला बाण?

भरत एक कुशल योद्धा थे, वे चाहते तो एक ही बाण में उस संकट को समाप्त कर सकते थे. लेकिन उन्होंने हनुमान जी पर बिना नोक वाला बाण चलाया, जिसे सायक भी कहा जाता है. इसके पीछे दो मुख्य कारण थे. भरत को पूरी तरह यकीन नहीं था कि उड़ने वाला कोई शत्रु ही है. उन्हें लगा कि अगर वह कोई मित्र हुआ, तो घातक बाण चलाने से अनर्थ हो जाएगा. राजा दशरथ ने बचपन में भरत को एक शिक्षा दी थी.

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दशरथ ने अनजाने में शब्दभेदी बाण चलाकर श्रवण कुमार की हत्या कर दी थी, क्योंकि उन्हें लगा था कि कोई जंगली जानवर पानी पी रहा है. उस एक गलती ने पूरे रघुवंश को पुत्र वियोग का श्राप और दुख दिया था. दशरथ ने भरत को समझाया था बेटा, जब तक तुम्हारी शंका पूरी तरह दूर न हो जाए तब तक कभी भी प्राणघातक बाण मत चलाना.

राम नाम ने बचा लिया अनर्थ

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जैसे ही भरत का बाण हनुमान जी को लगा, वे राम-राम जपते हुए नीचे गिर पड़े. राम का नाम सुनते ही भरत हैरत में पड़ गए. वे दौड़कर हनुमान जी के पास पहुंचे और उनसे क्षमा मांगी. जब उन्हें पता चला कि यह पवनपुत्र हनुमान हैं और वे उनके प्रिय भाई राम के काम के लिए जा रहे हैं, तो भरत की आंखों में आंसू आ गए. भरत ने अपने विवेक और पिता के अनुभव से सीख लेकर एक बहुत बड़े पाप को होने से रोक लिया. अगर उस दिन भरत घातक बाण चलाते, तो शायद लक्ष्मण के प्राण बचाना असंभव हो जाता.

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