भारत की ताकत का उभार: अगले 5 साल में प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर तक पहुंचेगी, चीन से होगी बराबरी

नई दिल्ली

भारत के पड़ोसी चीन की जीडीपी भले ही अभी भारत से अधिक हो, लेकिन कई आर्थिक संकेतकों में भारत अब उसके बराबर पहुंचने या उससे तेजी से नजदीक आने की स्थिति में है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक भारत ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी में शामिल हो जाएगा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन और इंडोनेशिया की बराबरी कर लेगा. यह रिपोर्ट भारत की आय संरचना में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है.

इनकम में चीन की बराबरी करेगा भारत  

एसबीआई के अनुसार, अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. भारत की आय में यह बढ़ोतरी लंबी और क्रमिक प्रक्रिया का नतीजा है. आजादी के बाद भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लग गए और यह मुकाम 2007 में हासिल हुआ. इस दौरान प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 में जहां मात्र 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई, यानी सालाना औसतन 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

इसके बाद भारत की आर्थिक रफ्तार में तेजी आई. आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग छह दशक लगे, लेकिन 2014 तक भारत दो ट्रिलियन डॉलर, 2021 तक तीन ट्रिलियन डॉलर और फिर सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया. इसके साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती है.

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5 ट्रिलियन डॉलर की ओर भारत
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा ग्रोथ ट्रेंड जारी रहा तो भारत अगले दो साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है. भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में करीब छह दशक लगे, लेकिन इसके बाद रफ्तार तेज हो गई.

    दूसरा ट्रिलियन सिर्फ 7 साल में जुड़ा
    तीसरा ट्रिलियन 2021 तक
    चौथा ट्रिलियन 2025 तक हासिल होने का अनुमान
    2027 के आसपास 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य संभव

प्रति व्यक्ति आय में तेज उछाल
SBI के मुताबिक, भारत को लो-इनकम देश से लोअर-मिडिल इनकम देश बनने में करीब 60 साल लगे.

    1962 में प्रति व्यक्ति आय: 90 डॉलर
    2007 में: 910 डॉलर
    2009 में: 1,000 डॉलर
    2019 में: 2,000 डॉलर
    2026 तक अनुमान: 3,000 डॉलर

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2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर (करीब 3.64 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही भारत अपर-मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां फिलहाल चीन और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार का संकेत देगा.

2047 का बड़ा लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक हाई-इनकम देश बने. इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को करीब 13,936 डॉलर तक ले जाना होगा. SBI का मानना है कि अगर भारत 7.5% की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि बनाए रखता है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. हालांकि, अगर हाई-इनकम की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो देश को और तेज रफ्तार से विकास करना होगा. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, उद्योग, निर्यात और संरचनात्मक सुधारों पर विशेष जोर देना जरूरी होगा.

वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति
पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से बेहतर रही है. ग्लोबल ग्रोथ रैंकिंग में भारत 95वें परसेंटाइल में पहुंच चुका है, यानी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 में जहां केवल 39 देश हाई-इनकम थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या बढ़कर 87 हो गई है. भारत भी अब तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है.

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साल दर साल आय में इजाफा

प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी यही रुझान देखने को मिला है. साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची और अगले दस वर्षों में, यानी 2019 तक, यह दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई. अनुमान है कि 2026 तक यह बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे देश की खपत क्षमता और मध्यम वर्ग का आकार और मजबूत होगा.

इसी पृष्ठभूमि में रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. मूडीज का मानना है कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा, जिसका सीधा असर बीमा जैसे क्षेत्रों की मांग पर पड़ेगा. एजेंसी के अनुसार, तेज ग्रोथ, बढ़ता डिजिटलीकरण, कर सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव बीमा प्रीमियम में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देंगे, जिससे उद्योग की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है.

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