विजन 2030 की राह में रोड़े! सऊदी प्रिंस MBS की महत्वाकांक्षी योजना क्यों डगमगाने लगी?

ब्लूमबर्ग, रियाद
सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी आर्थिक योजना विजन 2030 रास्ते में ही हिचकोले मारने लगी है। ऐसे में विजन 2030 में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब अब इस विजन के लिए नई रणनीति पेश करेगा जिसके तहत खर्च और प्राथमिकताओं में फेरबदल किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में चल रही इस योजना पर नई और अपडेटेड रणनीति जल्द सामने आ सकती है, जिसमें बदलते आर्थिक हालात और बढ़ते वित्तीय बोझ को ध्यान में रखते हुए नीतियों और सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं में बदलाव किया जाएगा।
 
सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों की रणनीति को कैसे जनता और निवेशकों तक पहुंचाया जाए, इस पर चर्चा शुरू कर चुकी है। यह बातचीत सऊदी अरब में आयोजित अलऊला इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमीज़ कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई। उन्होंने संकेत दिया कि नई रणनीति में पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर खास जोर होगा, हालांकि इसके विस्तृत ब्योरे और लॉन्च की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

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2034 फीफा वर्ल्ड कप से जुड़े नए स्टेडियम पर ग्रहण
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) समेत कई वैश्विक संस्थाएं सऊदी सरकार से अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट संवाद की मांग कर रही हैं। माना जा रहा है कि सरकार 2034 फीफा वर्ल्ड कप से जुड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे नए स्टेडियम की योजनाओं की भी दोबारा समीक्षा कर रही है। तेल पर निर्भरता कम करने के मकसद से शुरू किए गए विजन 2030 के तहत अब खर्च की दक्षता पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर को कम किया जा सकेगा और बजट घाटे पर भी काबू पाया जा सकेगा। साथ ही, निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को आकर्षित करना अब इस योजना की बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

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विजन 2030 पर कुल लागत करीब 2 ट्रिलियन डॉलर जा रही
ब्लूमबर्ग के अनुमानों के मुताबिक, विजन 2030 पर कुल लागत करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इस बीच, वित्त मंत्री अल-जादान ने कहा, “हम लगातार अपनी नीतियों को दोबारा प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि निजी क्षेत्र अर्थव्यवस्था का नेतृत्व कर सके।” गौरतलब है कि सऊदी अरब 2022 से बजट घाटे में चल रहा है, क्योंकि आर्थिक विविधीकरण पर खर्च तेल से होने वाली आय से ज्यादा रहा है। सरकार का कहना है कि यह घाटा जानबूझकर स्वीकार किया गया है ताकि अर्थव्यवस्था में निवेश जारी रह सके। सरकारी अनुमान के मुताबिक, बजट घाटा 2025 में 5.3% से घटकर इस साल 3.3% रह सकता है।

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सऊदी अरब को करीब 58 अरब डॉलर फंडिंग की जरूरत
हालांकि वॉल स्ट्रीट के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है। इस साल सऊदी अरब को करीब 58 अरब डॉलर की फंडिंग की जरूरत होगी और सरकार अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार से 17 अरब डॉलर तक जुटाने की योजना बना रही है। अल-जादान ने भरोसा जताते हुए कहा, “जरूरत पड़ी तो हमारे पास फंडिंग के कई रास्ते खुले हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में सऊदी जीडीपी तीन साल की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी, जिसमें नए ओपेक सप्लाई समझौते के तहत तेल क्षेत्र ने अहम भूमिका निभाई।

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