समंदर में पाकिस्तान के गुरूर की कब्र पर भारत का ‘निस्तार’ खड़ा, गर्व का पल

विशाखापत्तनम 
इंडियन नेवी के इतिहास
में कुछ तारीखें और कुछ जगहें ऐसी हैं, जो दुश्मन के कलेजे में हमेशा खौफ पैदा करती हैं. इस साल का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और ‘मिलन’ एक्सरसाइज एक बार फिर उसी इतिहास को जिंदा करने जा रहा है. इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश विशाखापत्तनम के उस समंदर से निकल रहा है, जहां आज से ठीक 55 साल पहले पाकिस्तान की अकड़ और उसका गुरूर पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) हमेशा के लिए दफन हो गया था. गर्व की बात यह है कि जहां गाजी की कब्र है, आज ठीक उसी जगह भारत का अपना स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा है. यह सिर्फ एक जहाज की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक ऐसा ट्रॉमा है जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा.

1971 की वो घटना, जब गाजी शिकार बन गया

    बात 1971 की है, जब पाकिस्तान ने भारत के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबोने के लिए अपनी सबसे घातक अमेरिकी सबमरीन पीएनएस गाजी को भेजा था. पाकिस्तान को लगा था कि गाजी चुपचाप आएगी और विशाखापत्तनम के पास विक्रांत का काम तमाम कर देगी. लेकिन इंड‍ियन नेवी की रणनीति के आगे गाजी की एक न चली.

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    आईएनएस राजपूत ने विशाखापत्तनम के तट के पास ही गाजी को ट्रैक किया और समंदर की गहराइयों में उसे हमेशा के लिए सुला दिया. उस वक्त जब गाजी के मलबे को खोजने और समंदर के नीचे डाइविंग ऑपरेशन चलाने की बारी आई, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने बखूबी अंजाम दिया था. आज उसी ‘निस्तार’ का आधुनिक और स्वदेशी अवतार उसी जगह मौजूद है, जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.

आईएनएस निस्तार यानी समंदर का बादशाह

भारतीय नौसेना को 18 जुलाई 2025 को अपना पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला. इससे पहले नौसेना के पास ऐसे जहाजों की भारी कमी थी, लेकिन अब निस्तार और निपुण के आने से भारत इस क्षेत्र में सेल्फ-रिलायंट बन गया है. न‍िस्‍तार की खूब‍ियां ऐसी हैं, ज‍िससे इसे समंदर के बादशाह के नाम से भी जाना जाता है.

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‘निस्तार’ क्यों है इतना खास?

    संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ होता है ‘मुक्ति’ या ‘उद्धार’. इससे आप न‍िस्‍तार की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. वैसे तो इसका मुख्य काम किसी भी सबमरीन इमरजेंसी के दौरान नौसैनिकों का रेस्क्यू करना है. लेकिन यह बहुत काम की चीज है.

    यह जहाज अपने साथ डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ले जाता है, जो गहरे समंदर में जाकर फंसी हुई सबमरीन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह जहाज लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है.

    निस्तार 120 मीटर लंबा और 10,000 टन वजनी है. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से सफर करता है. यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों और सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट सिस्टम से लैस है.

विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के लिए ‘डेथ जोन’

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में चीन और पाकिस्तान को कभी नहीं बुलाया जाता, लेकिन भारत की यह सामरिक तैयारी उनके लिए सबसे बड़ी चेतावनी है. जिस जगह गाजी डूबा था, आज वहां सिर्फ निस्तार ही नहीं, बल्कि भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है. यह वही विक्रांत है जिसे डुबोने का सपना लेकर गाजी आया था. आज विक्रांत का नया अवतार उसी जगह खड़ा होकर दुनिया को बता रहा है कि भारत की समुद्री सीमाएं अब अभेद्य हैं.

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निस्तार और निपुण की जोड़ी अभेद्य

नेवी के इस प्रोजेक्ट के तहत दो डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किए जा रहे हैं. निस्तार के बाद अब ‘निपुण’ पर काम तेजी से चल रहा है. ये दोनों जहाज भारतीय नौसेना को दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में खड़ा कर देंगे जिनके पास अपनी सबमरीन रेस्क्यू क्षमता है. कुल मिलाकर, विशाखापत्तनम में आईएफआर (IFR) का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं है. यह पाकिस्तान की उस हार का जश्न है जिसने 1971 में दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था. जहां पाकिस्तान का गुरूर दफन हुआ था, आज वहां भारत का ‘निस्तार’ खड़ा होकर नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है.

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