राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘चिरायु’ का कमाल: जन्मजात बधिर तीन बच्चों को एम्स रायपुर में नई सुनवाई

रायपुर

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का असर: जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का असर: जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और बाल स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर राज्य शासन की महत्वाकांक्षी पहल ने एक बार फिर ठोस परिणाम दिए हैं। जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन मासूम बच्चों का सफल कॉक्लियर इंप्लांट ऑपरेशन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में संपन्न हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम द्वारा समय पर पहचान और समन्वित प्रयासों के कारण इन बच्चों को निःशुल्क उन्नत उपचार उपलब्ध हो सका। वर्तमान में तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय देखरेख में हैं।

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आंगनबाड़ी से सुपर स्पेशियलिटी तक सुदृढ़ स्वास्थ्य श्रृंखला

कबीरधाम जिले के स/लोहारा विकासखंड स्थित ग्राम चिलमखोदरा निवासी धैर्य मरकाम (पिता– श्यामू मरकाम) जन्म से श्रवण बाधा से पीड़ित थे। चिरायु टीम ‘ए’ स/लोहारा द्वारा नियमित स्क्रीनिंग के दौरान समस्या की समय रहते पहचान की गई। आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण एवं रेफरल प्रक्रिया के बाद 16 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में उनका कॉक्लियर इंप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वर्तमान में बालक चिकित्सकीय निगरानी में है।

इसी क्रम में कोरबा जिले के बालको क्षेत्र निवासी ढाई वर्षीय नक्ष कोशले  की श्रवण समस्या का पता भी प्रारंभिक जांच के दौरान चला। विशेषज्ञ परामर्श के पश्चात 14 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में सर्जरी की गई। चिकित्सकों के अनुसार बालक स्वस्थ है तथा नियमित फॉलो-अप जारी है।

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सक्ति जिले के जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम हसौद की तीक्षिका साहू में भी जन्मजात बधिरता की पुष्टि आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग के दौरान हुई। चिरायु टीम जैजैपुर द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रकरण को उच्च संस्थान में रेफर किया गया। 17 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में सफल कॉक्लियर इंप्लांट के उपरांत अब तीक्षिका स्वस्थ हैं और स्पीच थेरेपी के माध्यम से श्रवण एवं भाषाई विकास की दिशा में निरंतर प्रगति कर रही हैं।

शासन की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता

इन तीनों मामलों में यह स्पष्ट हुआ है कि यदि समय रहते जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध हो तो जन्मजात श्रवण बाधा जैसी गंभीर समस्या का भी प्रभावी समाधान संभव है। चिरायु टीम की सतत स्क्रीनिंग, आंगनबाड़ी स्तर पर पहचान और उच्च संस्थान में निःशुल्क उपचार की व्यवस्था ने इन परिवारों को नई उम्मीद दी है।

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परिजनों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग ने उनके बच्चों का भविष्य बदल दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि कॉक्लियर इंप्लांट जैसी जटिल और महंगी सर्जरी सामान्य परिवारों के लिए अत्यंत कठिन होती है। किंतु शासन की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत यह उपचार निःशुल्क संभव हुआ। आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग, जिला स्तरीय चिकित्सा परीक्षण और सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में समयबद्ध सर्जरी यह संपूर्ण तंत्र राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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