भारत की ये 5 जगहें हैं नो-फ्लाई ज़ोन, जिनके ऊपर से नहीं गुजर सकता विमान

नई दिल्ली

 भारत में हवाई यात्रा तेजी से आधुनिक और सुरक्षित होती जा रही है, लेकिन आज भी देश में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां प्लेन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इन क्षेत्रों को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है, यानी इनके ऊपर से किसी भी विमान को गुजरने की अनुमति नहीं होती। यs प्रतिबंध किसी तकनीकी कमी की वजह से नहीं, बल्कि सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लगाया जाता है।

दरअसल, कई स्थान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होते हैं, कुछ जगहों पर महत्वपूर्ण सरकारी गतिविधियां चलती हैं, तो कुछ धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत अहम मानी जाती हैं। ऐसे में सरकार एयरस्पेस को नियंत्रित कर विशेष नियम लागू करती है। चाहे विमान कितने भी आधुनिक और एडवांस क्यों न हों, इन खास इलाकों के ऊपर उड़ान भरना सख्त रूप से मना है। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी है। आइए आपतो बताते हैं इन जगहों के बारे में।
 
 राष्ट्रपति भवन
    देश के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास होने के कारण यह इलाका देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है।
    यहां बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात रहती है।
     राष्ट्रपति भवन के ऊपर का एयरस्पेस विशेष रूप से प्रतिबंधित श्रेणी में आता है।
    यहां किसी भी तरह की अनधिकृत हवाई गतिविधिचाहे वह ड्रोन हो, हेलीकॉप्टर या निजी विमान सख्त रूप से प्रतिबंधित है।
    ये व्यवस्था राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है।

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संसद भवन
     भारतीय लोकतंत्र का केंद्र होने के कारण संसद भवन के ऊपर एयरस्पेस अत्यधिक नियंत्रित रहता है।
    यहां कानून निर्माण की प्रक्रिया चलती है और देश के शीर्ष नेता मौजूद रहते हैं।
     सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र को नो-ड्रोन जोन घोषित किया गया है।
     बिना अनुमति उड़ान भरना गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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प्रधानमंत्री आवास
    प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास भी उच्च सुरक्षा घेरे में आता है।
    यहां विशेष सुरक्षा समूह (SPG) और अन्य एजेंसियां निगरानी रखती हैं।
    यहां का एयरस्पेस पूरी तरह नियंत्रित रहता है और किसी भी प्रकार की निजी या व्यावसायिक उड़ान की अनुमति नहीं है।
    यहां ड्रोन उड़ाना भी सख्त रूप से प्रतिबंधित है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र
     मुंबई स्थित यह परमाणु अनुसंधान केंद्र देश की सामरिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है।
    यहां परमाणु अनुसंधान और संवेदनशील परियोजनाएं संचालित होती हैं।
    राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से इसके ऊपर का हवाई क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित है।
    किसी भी संदिग्ध हवाई गतिविधि को तुरंत सुरक्षा एजेंसियों द्वारा रोका जाता है।

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तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर
     दक्षिण भारत के इस प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
    भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मंदिर परिसर और उसके ऊपर के क्षेत्र को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।
     यहां हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर और ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं है।
    यह प्रतिबंध श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।

 

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