चैफ (चारा) कटर मशीन से पशुपालन में हुई आसानी

भोपाल

सोलह पशु… इनका पालन-पोषण… रोजाना कई बार चारा-पानी देते-देते सुबह से शाम हो जाती। काम बोझिल तो था, पर लोकेश को मन मारकर करना ही पड़ता था। सबसे से कठिनाई चारा काटने और पशुओं को खिलाने में होती थी। पर अब यह कठिनाई नहीं रही। लोकेश को सरकार की योजना से चारा कटर मशीन मिल गयी है। इससे लोकेश को चारा काटने में बेहद आसानी हो गई है।

बुरहानपुर जिले के बहादरपुर गांव के रहने वाले लोकेश भालोदे खेती-किसानी करते हैं। उनके पास छोटे-बड़े मिलाकर 16 पशु हैं। इन पशुओं के लिये वे घर पर ही चारा तैयार करते हैं। पशुओं के लिये चारा लाने, काटने, परोसने और पशुओं को खिलाने में काफी समय लग जाता था। एक दिन लोकेश को पता चला कि पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों को अनुदान पर चारा कटर मशीन दी जाती है। लोकेश ने विभाग से संपर्क किया। थोड़ी औपचारिकताओं के बाद लोकेश को 'राष्ट्रीय पशुधन मिशन' योजना से 'पॉवर ड्रिवन चैफ कटर मशीन' मिल गयी।

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चैफ (चारा) कटर मशीन के उपयोग से लोकेश का काम बेहद आसान हो गया है। वे इस मशीन से कुट्टी कर के पशुओं को चारा खिला रहे हैं। चारा कटाई के लिये लोकेश को अब कहीं दूर नहीं जाना पड़ता। इस मशीन से उसके समय और पूंजी की बचत तो हो ही रही है, पशु चारा भी अब वेस्ट नहीं होता है। इस मशीन से तैयार किया गया चारा उसके पशु बड़े चाव से खाते हैं। इससे उनका पाचन तंत्र भी मजबूत हो रहा है। लोकेश को उम्मीद है कि मशीन से तैयार किया चारा खाने से अब उसे दूध उत्पादन भी पहले से अधिक होगा।

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लोकेश बताते हैं कि बुरहानपुर और खकनार ब्लाक के कई गांवों में पशुपालकों को यह चारा कटर मशीन दी गई है। पर इस मशीन का सबसे अधिक लाभ उसे ही हो रहा है। लोकेश बताते हैं कि इस चारा कटर मशीन का खुदरा मूल्य 22 हजार 800 रूपये है। सरकार द्वारा उसे यह मशीन 12 हजार रूपये अनुदान राशि के साथ दी गई है।

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