रायपुर : महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल जानकी बिहान योजना

रायपुर : महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल जानकी

बिहान योजना से मिली नई उड़ान, जानकी बनीं सफल महिला उद्यमी

बिहान योजना :सरकारी योजनाओं के सहारे जानकी ने बदली अपनी और गांव की तस्वीर

रायपुर

जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो वे अद्भुत काम कर सकती हैं। वे शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, किसी भी क्षेत्र में काम कर सकती हैं और अपने लिए निर्णय ले सकती हैं। इससे न केवल उन्हें लाभ होता है, बल्कि परिवार और समुदाय भी मजबूत होते हैं। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसालें यह दर्शाती हैं कि शिक्षा, दृढ़ संकल्प और आर्थिक स्वतंत्रता से महिलाएं न केवल अपना भाग्य बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं।

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              धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम खर्रा की निवासी जानकी की सफलता की कहानी आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में खेती-बाड़ी में परिवार का सहयोग करने वाली जानकी आज एक सफल व्यवसायी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि के पीछे ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘बिहान’ योजना से मिला मार्गदर्शन और उनकी निरंतर मेहनत है।

      जानकी ने जय मां गायत्री महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्व-रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता मिली। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से प्राप्त ऋण की सहायता से कपड़ा व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत और ग्राहकों के विश्वास से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।

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      समूह के बैंक लिंकेज के माध्यम से अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए फैंसी स्टोर की शुरुआत की। इसके बाद मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान भी खोल ली। वर्तमान में उनके व्यवसाय में कपड़े, फैंसी सामग्री और जूते-चप्पल की बिक्री होती है, जिससे उन्हें हर माह अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

      जानकी केवल स्वयं ही आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। वे खेती-बाड़ी समूह की अध्यक्ष, ग्राम संगठन (वीओ) की अध्यक्ष तथा बीआरसी सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए महिलाओं को बचत, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।

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     जानकी की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत मिसाल भी बन सकती हैं।

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