मिसाइल और ड्रोन खतरे के बीच चुनौतीपूर्ण विमान यात्रा, पायलटों की कड़ी मेहनत

नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में घमासान के साथ-साथ दुनियाभर में चल रहे सैन्य संघर्षों ने सुरक्षित विमान यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच विमान पायलटों को भयानक तनाव के दौर से भी गुजरना पड़ रहा है।

बीते ढाई वर्षों में सैन्य संघर्षों में आई तेजी के चलते विमान यात्रा न केवल महंगी हुई है, बल्कि यात्राओं में लगनेवाला समय भी बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में जगह-जगह फंसे लोगों के लिए अपने देश वापस लौटना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। वहीं, मिसाइलों और ड्रोन से हवाई अड्डों पर हमले ने जमीन से लेकर आसमान तक संकट खड़े कर दिए हैं।

पायलटों पर बढ़ा बोझ
विमान पायलटों और सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन से अफगानिस्तान और इजरायल तक भीषण सैन्य संघर्षों ने पायलटों पर बोझ बढ़ा दिया है। उनके लिए एयर स्पेस बेहद सिकुड़ गया है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।

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पायलटों का कहना है कि वे सेना के पायलट नहीं है। उन्हें हवा में मौजूद खतरों से निपटने का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। मौजूदा संकट की वजह से विमानन क्षेत्र में सुरक्षा का खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे पायलटों में डर और चिंता गहराने लगी है। इसे देखते हुए एयरलाइंस कंपनियों ने मदद के लिए पीयर प्रोग्राम भी शुरू किए हैं, लेकिन इससे आंशिक मदद ही मिल रही है।

जीपीएस स्पूफिंग से भी बढ़ा खतरा
विमानन क्षेत्र को जीपीएस स्पूफिंग जैसे खतरों से भी निपटना पड़ रहा है, जिसमें विमानों को उनकी पोजीशन के बारे में दुर्भावनापूर्ण रूप से गुमराह करने का प्रयास किया जाता है। मिसाइल और ड्रोन के हमलों से बचने के लिए विमानों को ज्यादा ऊंचाई पर उड़ाया जा रहा है। मिसाइलों के हमले से बचने के लिए विमानों को 15000 फीट से ऊपर उड़ाया जा रहा है।

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इस मामले में पश्चिम एशिया के पायलट थोड़ा बहुत जोखिम भी उठा रहे हैं। लेबनान में बीते पांच मार्च को बेरूत हवाई अड्डे पर धुएं के बीच एक विमान के उड़ान भरने का वीडियो चर्चा में है। इस क्षेत्र के पायलटों का कहना है कि कोई भी ये गारंटी नहीं दे सकता कि हवाई अड्डों पर हमला नहीं होगा।

विमानों के लिए नई चुनौती बन रहे ड्रोन
विमानों को ड्रोन से भी खतरे बढ़ने लगे हैं। अपेक्षाकृत शांत इलाकों में भी ड्रोन उड़ने के मामले बढ़ रहे हैं। आकार में छोटे होने की वजह से ये जल्दी पहचान में नहीं आते और विमानों से टकराने का खतरा बना रहता है। विमानों में ट्रांसपोंडर के जरिये सिग्नल जारी होते रहते हैं, जिससे दूसरे विमानों को एक दूसरे की दूरी और पोजीशन का पता चलता रहता है, लेकिन ड्रोन के मामले में ऐसा नहीं होता।

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किसी पक्षी की तरह वे विमान से टकरा सकते हैं। यात्री विमानों के लिए इस्तेमाल होनेवाले नियमित राडार पर ड्रोन नजर नहीं आते। अमेरिका में काउंटरड्रोन तकनीक बनानेवाली कंपनी डीड्रोन के मुताबिक अमेरिका में 2025 में 12 लाख ड्रोन उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए हैं।

 

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