समंदर के भीतर भारत का अभेद्य किला: चीन-पाकिस्तान के लिए चुनौती

नई दिल्ली

भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है।

भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी तट पर समंदर के पास पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है, जिससे भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन अपनी हद पार करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसमें हर तरह की पनडुब्बियां शामिल हैं।

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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है।

वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है।

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आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे।

NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है।

दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे।

फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं।

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भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी। भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।

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