ईरान में हमलों के बीच मोजतबा खामेनेई पर चर्चा तेज, सुप्रीम लीडर Ali Khamenei कहां? उठे कई सवाल

ईरान
ईरान युद्ध के 12वें दिन मध्य-पूर्व में संघर्ष तेज हो गया है। एक तरफ ईरान तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक सवाल भी तेजी से कौंध रहा है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कहां हैं? ताजपोशी के कई दिनों बाद भी सार्वजनिक तौर पर मोजतबा की अनुपस्थिति ने कई बड़े सवालों और अटकलों को जन्म दिया है। कुछ रिपोर्टों में उनके घायल होने की बात कही गई है। इन अटकलों के बीच ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह “सुरक्षित और स्वस्थ” हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बेटे और सरकारी सलाहकार यूसुफ पेज़ेशकियन ने टेलीग्राम पर एक संदेश में कहा कि उन्होंने मोजतबा खामेनेई के घायल होने की अफवाहों की पुष्टि करने की कोशिश की थी। उन्होंने लिखा कि उनसे जुड़े लोगों ने बताया है कि “खामेनेई सुरक्षित हैं और उन्हें कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।” इस बीच, इजरायल के खुफिया अधिकारियों ने दावा किया है कि मोजतबा घायल हैं।

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सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने
रविवार को ईरान का सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा खामेनेई ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान या भाषण जारी नहीं किया है। उनकी इस अनुपस्थिति से देश और विदेश में उनकी सेहत और लोकेशन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि हालिया हमलों में मोजतबा खामेनेई के पैरों में चोट आई थी। रिपोर्ट के अनुसार वह फिलहाल एक अत्यंत सुरक्षित स्थान पर रह रहे हैं और सीमित संपर्क में हैं।

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युद्ध के बीच बढ़ती अनिश्चितता
खामेनेई की हालत को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय में है जब मिडिल ईस्ट में लड़ाई लगातार बढ़ रही है। यह लड़ाई ईरान पर US-इजरायली हमलों से शुरू हुई थी और तब से इसमें कई रीजनल एक्टर्स शामिल हो गए हैं, जिसमें मिसाइल हमले, ड्रोन इंटरसेप्शन और खाड़ी में नेवी की घटनाओं की खबरें शामिल हैं। मोजतबा खामेनेई के पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमलों में मौत हो गई थी। इसके बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया।

क्षेत्रीय संकट गहराने की आशंका
इस युद्ध के दौरान ईरान और इज़रायल के बीच मिसाइल हमले जारी हैं। वहीं सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों ने अपनी सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया है। इसके अलावा ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने यह भी कहा है कि उसने कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर मिसाइल दागी है, हालांकि कुवैत ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वहीं ईरान के नए सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता इस संकट को और जटिल बना रही है।

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