क्या सच में धोनी ने युवराज को टीम से बाहर कराया? पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने खोला राज

नई दिल्ली
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता Sandeep Patil ने एक लंबे समय से चल रहे विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि MS Dhoni का Yuvraj Singh को भारतीय टीम से बाहर करने के फैसले में कभी कोई हाथ नहीं था। पाटिल ने बताया कि अपने चयनकर्ता कार्यकाल के दौरान उन्होंने कभी भी धोनी को युवराज को ड्रॉप करने की मांग करते नहीं सुना। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब युवराज के पिता लगातार धोनी पर आरोप लगाते रहे हैं।

चयन बैठकों में कभी नहीं उठी ऐसी मांग
संदीप पाटिल ने एक इंटरव्यू में कहा कि चयन समिति की बैठकों, विदेशी दौरों या मैचों के दौरान कभी भी धोनी ने युवराज सिंह को टीम से बाहर करने की बात नहीं कही। उन्होंने कहा कि वह इस बात को पूरी जिम्मेदारी के साथ रिकॉर्ड पर कह सकते हैं कि धोनी ने ऐसा कोई सुझाव या दबाव नहीं बनाया। पाटिल के अनुसार, धोनी का चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का स्वभाव भी नहीं था और वह चयन समिति के फैसलों का सम्मान करते थे।

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धोनी को था चयन समिति पर पूरा भरोसा
पाटिल ने आगे कहा कि धोनी हमेशा चयनकर्ताओं के निर्णयों का सम्मान करते थे। उन्होंने बताया कि टीम के कप्तान के तौर पर धोनी को चयन समिति की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा था और वह आमतौर पर टीम चयन के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देते थे। इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि युवराज सिंह को टीम से बाहर करने का फैसला चयनकर्ताओं की रणनीति और उस समय के प्रदर्शन के आधार पर लिया गया होगा।

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योगराज सिंह लगातार लगाते रहे हैं आरोप
दूसरी ओर युवराज सिंह के पिता Yograj Singh कई बार सार्वजनिक रूप से धोनी को अपने बेटे के करियर में गिरावट के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। योगराज ने कई इंटरव्यू में यह कहा कि धोनी के कारण ही युवराज को टीम से बाहर किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि वह इस मामले में धोनी को कभी माफ नहीं करेंगे।

एक इंटरव्यू में योगराज सिंह ने कहा था कि धोनी ने उनके बेटे के साथ गलत किया और इससे युवराज का करियर प्रभावित हुआ। उन्होंने यहां तक कहा कि युवराज सिंह जैसा खिलाड़ी फिर से देखने को शायद ही मिले और वह चार-पांच साल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकते थे। उनके इस बयान ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा पैदा की थी।

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पाटिल ने कहा – पिता का भावुक होना स्वाभाविक
संदीप पाटिल ने योगराज सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक पिता का अपने बेटे के लिए भावुक होना बिल्कुल स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में आरोप गलत व्यक्ति पर लगाए जा रहे हैं। पाटिल के अनुसार, चयन प्रक्रिया कई पहलुओं को ध्यान में रखकर होती है और किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।

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