चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी पलटी, शुभेंदु अधिकारी के करीबी नेता ने जॉइन की TMC

कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां शुभेंदु अधिकारी के पूर्व वफादार माने जाने वाले नेता ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। यह नेता पबित्र कर हैं, जो पूर्व में नंदीग्राम-2 ब्लॉक के बोयाल-1 ग्राम पंचायत के प्रधान थे। उन्होंने बीजेपी छोड़कर टीएमसी की सदस्यता ग्रहण की और यह घटना पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में हुई। TMC ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पबित्र बीजेपी की जन-विरोधी नीतियों से असंतुष्ट होकर वापस लौटे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं और टीएमसी जल्द ही अपनी उम्मीदवारों की सूची घोषित करने वाली है। राजनीतिक हलकों में इस घटना को काफी महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि नंदीग्राम सीट पहले से ही विवादास्पद और चर्चित बनी हुई है।

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पबित्र कर का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। नवंबर 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। BJP में शामिल होने के बाद उन्होंने बोयाल-1 क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी मेहनत का असर दिखा, जब बीजेपी को इस इलाके में बढ़त मिली। उसी चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को महज 1,900 से थोड़े अधिक वोटों के अंतर से नंदीग्राम सीट पर हराया था, जिसने पूरे राज्य की सियासत को हिला दिया था। पबित्र को सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाता था, इसलिए उनकी टीएमसी में वापसी को एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है। यह कदम बीजेपी के लिए नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में झटका साबित हो सकता है।

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TMC का झंडा लहराने वाली तस्वीर
अभिषेक बनर्जी के हाथों से टीएमसी का झंडा थामते हुए पबित्र कर की तस्वीरें वायरल हो गई हैं। यह घटना उम्मीदवारों की सूची घोषणा से महज कुछ घंटे पहले हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में जोरदार अटकलों को जन्म दिया है। कई विश्लेषकों और नेताओं का मानना है कि टीएमसी पबित्र कर को नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह चुनावी मुकाबला और भी रोमांचक हो जाएगा, क्योंकि दोनों नेताओं के बीच पहले से व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। नंदीग्राम 2021 में ममता बनर्जी की हार का प्रतीक बन चुका है और टीएमसी इसे वापस जीतकर अपनी ताकत दिखाना चाहती है। इस संभावित टक्कर से स्थानीय स्तर पर मतदाताओं की राय भी प्रभावित हो सकती है।

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यह घटनाक्रम बंगाल की सियासत में बदलते समीकरणों को दर्शाता है। जहां एक तरफ बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, वहीं टीएमसी पुराने नेताओं को वापस लाकर व नए चेहरों को मौका देकर अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करना चाहती है। पबित्र कर की वापसी न केवल नंदीग्राम बल्कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के अन्य हिस्सों में भी टीएमसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में जब TMC की उम्मीदवार सूची जारी होगी तो इस अटकल का जवाब मिल जाएगा। फिलहाल यह कदम बंगाल की राजनीति में नया तड़का जोड़ने वाला साबित हो रहा है और सभी की निगाहें नंदीग्राम पर टिकी हुई हैं।

 

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