DGCA के आदेश पर बवाल, इंडिगो और एअर इंडिया ने विरोध जताया, टिकट महंगे होने की दी चेतावनी

 नई दिल्ली

आपने कभी फ्लाइट बुक की होगी तो देखा होगा कि टिकट का दाम अलग होता है और सीट चुनने का चार्ज अलग. विंडो सीट चाहिए? पैसे दो. आगे की सीट चाहिए? और पैसे दो. परिवार के साथ बैठना है? उसके लिए भी पैसे. यह एक तरह से एयरलाइंस की अलग कमाई है। अब सरकार ने कहा, "नहीं. हर फ्लाइट की 60 फीसदी सीटें यात्रियों को फ्री में दो. सीट चुनने के पैसे मत लो." और इस पर एयरलाइंस भड़क गई हैं। 

किसने क्या कहा?
सरकार का यह फैसला MoCA यानी नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने लिया. और 18 मार्च 2026 को इसका ऐलान कर दिया. इसके खिलाफ FIA यानी भारतीय एयरलाइंस महासंघ ने MoCA के सचिव समीर सिन्हा को चिट्ठी लिखी है. FIA में कौन-कौन है? इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइसजेट. यानी देश की तीन सबसे बड़ी एयरलाइंस। 

ये भी पढ़ें :  LPG पर अब 'नो-टेंशन': 15 देशों से गैस सप्लाई, सरकार का बड़ा फैसला

एयरलाइंस का तर्क क्या है?
एयरलाइंस का कहना है कि यह फैसला उल्टा पड़ेगा. उनका कहना है कि पैसा तो यात्री ही देगा. एयरलाइंस ने साफ कहा, "अगर हम सीट का चार्ज नहीं लेंगे, तो वो पैसा कहीं से तो आएगा. और वो आएगा टिकट के दाम बढ़ाकर। 

इसपर सोचने वाली बात है कि अभी आप 4,000 में टिकट लेते हैं और 300 में मनपसंद सीट. कुल 4,300. कल को हो सकता है टिकट ही 4,500 का हो जाए और सीट भले फ्री हो. आपका फायदा क्या हुआ?

FIA का कहना है कि जो लोग सस्ती फ्लाइट लेते हैं. बजट ट्रैवलर, परिवार, बार-बार उड़ने वाले लोग उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा. क्योंकि टिकट महंगे होंगे और उनकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 

ये भी पढ़ें :  सोनम वांगचुक का बड़ा बयान! पत्थरबाजों पर कार्रवाई की मांग, CJP को जश्न मनाने पर दी नसीहत

एयरलाइंस की अपनी पहचान खत्म होगी
अभी हर एयरलाइन अपने तरीके से सेवा देती है. कोई सस्ती सीट देता है, कोई ज्यादा लेगरूम देता है, कोई बेहतर खाना देता है. इससे यात्री अपनी पसंद की एयरलाइन चुन सकते हैं. अगर सब एक जैसे नियमों में बंध जाएंगे तो यह अलगप्पन खत्म हो जाएगा। 

एयरलाइंस ने एक और बड़ा सवाल उठाया
FIA ने यह भी कहा कि DGCA यानी जो सरकारी संस्था हवाई यातायात देखती है उसे कानूनी तौर पर यह अधिकार ही नहीं है कि वो सीट चार्ज जैसी अलग सेवाओं के दाम तय करे। 

पहले की अदालती फैसलों का हवाला देते हुए कहा, "यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता." यानी एयरलाइंस सिर्फ विरोध नहीं कर रहीं वो यह भी कह रही हैं कि यह आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है। 

ये भी पढ़ें :  Tata Group की एक और कंपनी लेकर आ रही IPO, 15000Cr का होगा साइज, जानिए कबतक आएगा

सबसे बड़ी शिकायत – बिना पूछे फैसला
एयरलाइंस की सबसे बड़ी नाराजगी यह है कि यह आदेश बिना किसी से पूछे आ गया. FIA ने चिट्ठी में लिखा, "18 मार्च को प्रेस रिलीज से पहले हमें कुछ नहीं बताया गया. न कोई बैठक हुई, न कोई सलाह ली गई." यानी एक दिन अखबार में खबर आई और एयरलाइंस को पता चला कि सरकार ने नया नियम बना दिया। 

एयरलाइंस की मांग क्या है?
FIA ने सरकार से साफ कहा है कि यह आदेश वापस लीजिए. और यह भी चेताया कि अगर यह चलता रहा तो भविष्य में सरकार किसी भी सेवा के दाम में दखल दे सकती है. इससे एयरलाइंस को अपना कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment