यूपीसीडा की पहल से 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹800 करोड़ निवेश प्रस्तावित

योगी सरकार के विजन को मिली गति, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ा भरोसा

अब तक 61 परियोजनाओं को स्वीकृति, ₹12,900 करोड़ से अधिक निवेश से किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ

लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 8 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें लगभग ₹800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। सरकार की उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति-2022 के तहत निवेशकों को निजी भूमि पर लॉजिस्टिक्स और भंडारण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता और टैक्स छूट दी जा रही है। इसी नीति के प्रभाव से निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इन नई स्वीकृत परियोजनाओं में 5 साइलो, 2 वेयरहाउसिंग और 1 लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो उन्नाव, औरैया, बलरामपुर, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, लखनऊ, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़ समेत विभिन्न जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के तहत लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में विकास होगा, जिससे प्रदेश की कृषि और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

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61 परियोजनाओं को मिल चुकी मंजूरी, ₹12,900 करोड़ से अधिक निवेश
इन 8 नई परियोजनाओं के साथ ही अब तक यूपीसीडा द्वारा वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति-2022 और पीआईपी नीति के अंतर्गत कुल 61 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। ये परियोजनाएं करीब 810 एकड़ भूमि पर विकसित होंगी और इनमें ₹12,900 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं से अनाज के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ेगी, किसानों को बेहतर स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं मिलेंगी तथा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस क्लस्टर और आधुनिक वितरण केंद्रों के विकास को गति मिलेगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के अवसर भी उत्पन्न होंगे।

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निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस
राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनाना है। इसके लिए मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, कोल्ड चेन, साइलो और वितरण केंद्रों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लगातार बेहतर किया जा रहा है। प्राधिकरण का प्रयास है कि नीति के तहत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन निवेशकों तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाए जाएं। सरकार न केवल निवेश आकर्षित करने, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

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